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Roushan Kumar Bharti
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2 दिन पहले
"हजारों रात का जागा हूँ सोना चाहता हूँ अब, तुझे मिलके में ये पलकें भिगोना चाहता हूँ अब, बहुत ढूंढा है तुझ को खुद में, इतना थक गया हूँ मैं, कि खुद को सौंप कर तुझ को, मैं खोना चाहता हूँ मैं"..!! 🤍❤️
#✍️ साहित्य एवं शायरी
#❤️शुभकामना सन्देश
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