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#गुलज़ार शायरी #Aapne dil ki bate
गुलज़ार शायरी - नसीब खुद लिखा है हमने किसी से शिकवा क्या करना. समुद्र से उलझ बैठे है तो अब से क्या डरना....!!* लहरों नसीब खुद लिखा है हमने किसी से शिकवा क्या करना. समुद्र से उलझ बैठे है तो अब से क्या डरना....!!* लहरों - ShareChat