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मेरी डायरी ✍️ - रोटी का कोई धर्म नही होता पानी की कोई जात नही होती जहाँ इंसानियात जिंदा है वहां मजहब की कोई बात नही होती, বন মী তীন ক লিব  दो कपडा चार रोटी ही काफी है पर बेचैनी से जीने के लिए चार गाडी और तीन घर भी कम है। RUPESH KUMAR BANSOD रोटी का कोई धर्म नही होता पानी की कोई जात नही होती जहाँ इंसानियात जिंदा है वहां मजहब की कोई बात नही होती, বন মী তীন ক লিব  दो कपडा चार रोटी ही काफी है पर बेचैनी से जीने के लिए चार गाडी और तीन घर भी कम है। RUPESH KUMAR BANSOD - ShareChat