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#🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी
🖋शेरो-शायरी - "ज़मीन' पर पाँव रखकर , 'आसमान" छूने की फितरत है मेरी. ! "गिरा कर" किसी को , "ऊपर" ऊठने का शौक नही. ! "ज़मीन' पर पाँव रखकर , 'आसमान" छूने की फितरत है मेरी. ! "गिरा कर" किसी को , "ऊपर" ऊठने का शौक नही. ! - ShareChat