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#😒दर्द भरी शायरी🌸 #💔दर्द कविताएं
😒दर्द भरी शायरी🌸 - कुछ गुज़री, कुछ गुज़ार दी.! कुछ निखरी, कुछ निखार दी.! ತತ [ತ,; कुछ बिगाड़ दी. ! कुछ अपनी रही, कुछ अपनों पर वार दी.! ক্রুৃন্ত ব্রংক্র মী ভুনী, कुछ इश्क ने तार दी.! कुछ दोस्त साथ रहे, ने उतार दी॰ दुश्मनों कुछ कसर बस... ज़िन्दगी जैसी मिली, ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी॰. कुछ गुज़री, कुछ गुज़ार दी.! कुछ निखरी, कुछ निखार दी.! ತತ [ತ,; कुछ बिगाड़ दी. ! कुछ अपनी रही, कुछ अपनों पर वार दी.! ক্রুৃন্ত ব্রংক্র মী ভুনী, कुछ इश्क ने तार दी.! कुछ दोस्त साथ रहे, ने उतार दी॰ दुश्मनों कुछ कसर बस... ज़िन्दगी जैसी मिली, ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी॰. - ShareChat