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mantra - 448 संयुक्त ऊर्जा केवल उपासना नहीं बल्कि शाबर परम्परा रक्षा, संबल और संकट नाश का साधन है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इसका नामोच्चार श्रद्धा से करता है उसके जीवन में अचानक आने वाले संकट, कर्ज़ मुकदमे, बीमारी, भूत प्रेत टूटकर गिरते हैं। और दुर्भाग्य परम्परा में प्रचलित मंत्र ऊँ नमो भैरव शनि राजा काल भैरव महाशक्तिजा दुष्ट ग्रह दुःख निवारण भूत प्रेत पिशाच विदारण भैरव शनि करि रक्षा सर्व संकट क्षय स्वाहा इस मंत्र का प्रभाव किसी दिखावे या अंधविश्वास का नहीं बल्कि अनुभवजन्य और धारणा-शक्ति पर आधारित माना गया है। यह साधक के चारों ओर एक सुरक्षा क्षेत्र निर्मित करता है और जीवन में जमी हुई रुकावटों को काटकर मार्ग प्रशस्त करता है। जप में डर या लालच की नहीं , दृढ़ मन और संकल्प की आवश्यकता है। जब साधक अपनी ऊर्जा को स्थिर करके इस नाम का उच्चारण करता है तो जीवन के अंधेरे कोनों में प्रकाश दिखाई देने लगता है। 448 संयुक्त ऊर्जा केवल उपासना नहीं बल्कि शाबर परम्परा रक्षा, संबल और संकट नाश का साधन है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इसका नामोच्चार श्रद्धा से करता है उसके जीवन में अचानक आने वाले संकट, कर्ज़ मुकदमे, बीमारी, भूत प्रेत टूटकर गिरते हैं। और दुर्भाग्य परम्परा में प्रचलित मंत्र ऊँ नमो भैरव शनि राजा काल भैरव महाशक्तिजा दुष्ट ग्रह दुःख निवारण भूत प्रेत पिशाच विदारण भैरव शनि करि रक्षा सर्व संकट क्षय स्वाहा इस मंत्र का प्रभाव किसी दिखावे या अंधविश्वास का नहीं बल्कि अनुभवजन्य और धारणा-शक्ति पर आधारित माना गया है। यह साधक के चारों ओर एक सुरक्षा क्षेत्र निर्मित करता है और जीवन में जमी हुई रुकावटों को काटकर मार्ग प्रशस्त करता है। जप में डर या लालच की नहीं , दृढ़ मन और संकल्प की आवश्यकता है। जब साधक अपनी ऊर्जा को स्थिर करके इस नाम का उच्चारण करता है तो जीवन के अंधेरे कोनों में प्रकाश दिखाई देने लगता है। - ShareChat