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#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👍 संदीप माहेश्वरी के विचार
सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है - जय गुरु देव  ७२ घंटे की अखण्ड नामध्वनि नियमावली दिनांक २२ जनवरी २०२६ २४ जनवरी २०२६, शनिवार को सुबह ९:०० बजे से २७ जनवरी २०२६, 1 नामध्वनि मंगलवार को सुबह ९:०० बजे तक ७२ घंटे (३ दिन) अखण्ड शिविर जहां-्जहां लग सके अधिक से अधिक जगहों पर लग जाये। २. जहां जहां आश्रम है वहा सब जगह अखण्ड नामध्वनि शिविर लग जाए। सम्बन्धियों   हित-मित्रों, ३. सभी   नामदानी सतसंगी   अपने # नाते- रिश्तेदारों, परिचितों आदि को निमंत्रण देकर के, प्रसार करक प्रचार नामध्वनि शिविर में अधिक से अधिक प्रेमियों को शामिल करें | अखण्ड नामध्वनि शिविर खण्डित न हो इसके लिए कम से कम चार या इससे 4 अधिक जितने मिल जाये लोगों की टोलियाँ बन जायें और दो आदमी नामध्वनि बोले और दूसरी टोली इसको दोहराए और साथ के अन्य लोग टीमों के साथ नामध्वनि दोहराते रहें। टोली नामध्वनि बोले तो बीच में अखण्ड नामध्वनि का 51 मतलब তন্র तार न टूटे तथा दोनों टोलियों के बीच में नामध्वनि बोलते समय कोई गैप 77గ/ नामध्वनि में जाती हैं तो सुबह जब उजाला हो जाए तब ६. महिलाएं अगर वहां जाएं और इस तरह से वहां से चल पडे़ कि उजाले उजाले तक, अंधेरा होने से पहले तक अपने घर पर पहुंच जाएं। ७. बड़े स्थान या आश्रमों परजो नाम ध्वनि शिविर लगें उसमें महिलाओं के बैठकर बोलने की अलग व्यवस्था रहेगी तो अच्छा रहेगा। सब लोग आंख बंद करके नाम ध्वनि बोलेंगे और जब नाम ध्वनि बोलेंगे 8 करेगें जब करके गुरु का होगा तब आँख तब आँखे बन्द যান जाना निगरानी करने वाले खुली आंख वालों को खोलकर उठ कर चले जायेंगे आंख बंद करके बोलने दिया करेंगे। जो लोग अपने इशारा কা कर रिश्तेदारों को या मित्रों को बुलाएंगे वे यदि देर तक रुकते हैं तो उनके भोजन, जलपान, विश्राम का ध्यान रखेंगे। 1 | P a g e जय गुरु देव  ७२ घंटे की अखण्ड नामध्वनि नियमावली दिनांक २२ जनवरी २०२६ २४ जनवरी २०२६, शनिवार को सुबह ९:०० बजे से २७ जनवरी २०२६, 1 नामध्वनि मंगलवार को सुबह ९:०० बजे तक ७२ घंटे (३ दिन) अखण्ड शिविर जहां-्जहां लग सके अधिक से अधिक जगहों पर लग जाये। २. जहां जहां आश्रम है वहा सब जगह अखण्ड नामध्वनि शिविर लग जाए। सम्बन्धियों   हित-मित्रों, ३. सभी   नामदानी सतसंगी   अपने # नाते- रिश्तेदारों, परिचितों आदि को निमंत्रण देकर के, प्रसार करक प्रचार नामध्वनि शिविर में अधिक से अधिक प्रेमियों को शामिल करें | अखण्ड नामध्वनि शिविर खण्डित न हो इसके लिए कम से कम चार या इससे 4 अधिक जितने मिल जाये लोगों की टोलियाँ बन जायें और दो आदमी नामध्वनि बोले और दूसरी टोली इसको दोहराए और साथ के अन्य लोग टीमों के साथ नामध्वनि दोहराते रहें। टोली नामध्वनि बोले तो बीच में अखण्ड नामध्वनि का 51 मतलब তন্র तार न टूटे तथा दोनों टोलियों के बीच में नामध्वनि बोलते समय कोई गैप 77గ/ नामध्वनि में जाती हैं तो सुबह जब उजाला हो जाए तब ६. महिलाएं अगर वहां जाएं और इस तरह से वहां से चल पडे़ कि उजाले उजाले तक, अंधेरा होने से पहले तक अपने घर पर पहुंच जाएं। ७. बड़े स्थान या आश्रमों परजो नाम ध्वनि शिविर लगें उसमें महिलाओं के बैठकर बोलने की अलग व्यवस्था रहेगी तो अच्छा रहेगा। सब लोग आंख बंद करके नाम ध्वनि बोलेंगे और जब नाम ध्वनि बोलेंगे 8 करेगें जब करके गुरु का होगा तब आँख तब आँखे बन्द যান जाना निगरानी करने वाले खुली आंख वालों को खोलकर उठ कर चले जायेंगे आंख बंद करके बोलने दिया करेंगे। जो लोग अपने इशारा কা कर रिश्तेदारों को या मित्रों को बुलाएंगे वे यदि देर तक रुकते हैं तो उनके भोजन, जलपान, विश्राम का ध्यान रखेंगे। 1 | P a g e - ShareChat