ShareChat
click to see wallet page
search
#जयश्रीकृष्णा🙏🌹 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
जयश्रीकृष्णा🙏🌹 - १४ फरवरी २०२६ प्रेम का स्वभाव प्रेम अर्थात वासना से मुक्त होना। प्रेम की कोई माँग नहीं, प्रेम की कोई शर्त नहीं और प्रेम का कोई कारण भी नहीं। प्रेम निस्वार्थ है, प्रेम बेशर्त है और प्रेम अकारण ही है। समर्पण की गहराइयों से प्रेम का जन्म होता है, इसीलिए प्रेम   पाना नहीं अपितु 7 देना चाहता है। प्रेम लूटना नहीं , स्वयं लुटना के सुख में ही हमारा सुख है, चाहता है। दूसरों दूसरों प्रसन्नता है, यही प्रेम का की प्रसन्नता में ही हमारी स्वभाव है। बिना प्रेम के जीवन का सौंदर्य विकसित नहीं हो सकता। प्रेम ही जीवन को सरस बनाता है, प्रेम ही जीवन को आनंद के भर देता है और 77 प्रेम ही जीवन को प्रसन्नता की से महका देता सुगंधि कामना है, वहाँ प्रेम नहीं है। जहाँ स्वयं के सुख की 31ತ मोह है, वासना है। वासना गिराती है-प्रेम उठाता है, वासना बंधक बनाती है-प्रेम मुक्त करता है और वासना स्वयं की तरफ खींचती है-प्रेम परमात्मा से जोड़ देता है। सही मायने में यही प्रेम का स्वभाव 81 जय श्री राधे कृष्ण १४ फरवरी २०२६ प्रेम का स्वभाव प्रेम अर्थात वासना से मुक्त होना। प्रेम की कोई माँग नहीं, प्रेम की कोई शर्त नहीं और प्रेम का कोई कारण भी नहीं। प्रेम निस्वार्थ है, प्रेम बेशर्त है और प्रेम अकारण ही है। समर्पण की गहराइयों से प्रेम का जन्म होता है, इसीलिए प्रेम   पाना नहीं अपितु 7 देना चाहता है। प्रेम लूटना नहीं , स्वयं लुटना के सुख में ही हमारा सुख है, चाहता है। दूसरों दूसरों प्रसन्नता है, यही प्रेम का की प्रसन्नता में ही हमारी स्वभाव है। बिना प्रेम के जीवन का सौंदर्य विकसित नहीं हो सकता। प्रेम ही जीवन को सरस बनाता है, प्रेम ही जीवन को आनंद के भर देता है और 77 प्रेम ही जीवन को प्रसन्नता की से महका देता सुगंधि कामना है, वहाँ प्रेम नहीं है। जहाँ स्वयं के सुख की 31ತ मोह है, वासना है। वासना गिराती है-प्रेम उठाता है, वासना बंधक बनाती है-प्रेम मुक्त करता है और वासना स्वयं की तरफ खींचती है-प्रेम परमात्मा से जोड़ देता है। सही मायने में यही प्रेम का स्वभाव 81 जय श्री राधे कृष्ण - ShareChat