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#guljar ki shayari
guljar ki shayari - गलज़ार प्यार. कविता कोश इक बहता दरिया है, झील नहीं कि जिसको किनारे बाँध के बैठे रहते है, सागर भी नहीं कि जिसका किनारा नहीं होता, ) बस दरिया है sanjay और बह जाता है! गलज़ार प्यार. कविता कोश इक बहता दरिया है, झील नहीं कि जिसको किनारे बाँध के बैठे रहते है, सागर भी नहीं कि जिसका किनारा नहीं होता, ) बस दरिया है sanjay और बह जाता है! - ShareChat