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#मन की बात
मन की बात - "मेरी आवाज़ धीमी हो गई..." मैं पहले बहुत खुलकर बोलती थी॰ भी॰.. अपना दर्द भी॰ अपनी खुशी लेकिन धीरेन्धीरे समझ आ गया लिए মহী নান ক্িমী ক इतनी ज़रूरी नहीं थीं.. जब भी कुछ कहना चाहा, তনান িলা  "इतना मत सोचा करो... रहने दो..." फिर मैंने बोलना कम कर दिया... रोना भी चुपचाप सीख लिया... अब लोग कहते हैं "तुम पहले जैसी नहीं रहीं... कैसे बताऊँ आवाज़ नहीं बदली है मेरी, बस उम्मीद कम हो गई है.. "मेरी आवाज़ धीमी हो गई..." मैं पहले बहुत खुलकर बोलती थी॰ भी॰.. अपना दर्द भी॰ अपनी खुशी लेकिन धीरेन्धीरे समझ आ गया लिए মহী নান ক্িমী ক इतनी ज़रूरी नहीं थीं.. जब भी कुछ कहना चाहा, তনান িলা  "इतना मत सोचा करो... रहने दो..." फिर मैंने बोलना कम कर दिया... रोना भी चुपचाप सीख लिया... अब लोग कहते हैं "तुम पहले जैसी नहीं रहीं... कैसे बताऊँ आवाज़ नहीं बदली है मेरी, बस उम्मीद कम हो गई है.. - ShareChat