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✍️ साहित्य एवं शायरी - < ज़मीर बेच के लौटा जब ऊंचे दामों पर, जो भी रास्ते में मिला वो बधाई देने लगा , < ज़मीर बेच के लौटा जब ऊंचे दामों पर, जो भी रास्ते में मिला वो बधाई देने लगा , - ShareChat