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ऊँ सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा।। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 ज्ञानविज्ञानरूपायै ज्ञानमूर्ते नमो नमः। नाना शास्त्र स्वरूपायै नानारूपे नमो नमः।। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 🌺 🌺 🌺 🌺 🌺 🌺 🌺 🌺 आप सभी को माँ सरस्वती पूजन एवं बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।। ......🙏 - रघुवीर तिवारी "योगी" #बसंत पंचमी #📖 कविता और कोट्स✒️
बसंत पंचमी - ।। सरस्वती वंदना / वीणापाणि मां शारदे स्वर में मेरे झंकार दे। हे वर्णमातृका भगवती, मेरे शब्दों को श्रृंगार दे।।  लेखनी लिखे सत्य सदा, मन निर्झर सा हो निर्मल। कमल आसनी मेरा जीवन कर दे पुष्प जलज सा उज्जवल। मेरे जीवन में सदैव सद्गुण की अनुपम बहार दे।.. वीणापाणि मा शारदे, स्वर में मेरे झंकार दे।। वर दे हंस वाहिनी मां सही गलत में भेद कर सकूं।  इतना मां साहस भी देना, सत्य सदा अभिव्यक्त कर सकूं। अवगुण खोटापन काट सके, मां लेखन में इतनी धार दे।॰. वीणापाणि मां शारदे स्वर में मेरे झंकार दे।। जब मन में घोर निराशा हो, आशा की राह दिखा देना। थक चूर यदि मैं सो जाऊं देकर स्फूर्ति जगा देना।  सबके मन से द्वेष हटा, अनुपम सबको मात प्यार दे। वीणापाणि मां शारदे स्वर में मेरे झंकार दे।। मेरे जीवन का दीप बुझेपर शब्दों का दीप न बुझ पाए। देशप्रेम भक्ति- मानवता समता की जो राह दिखाए। योगी भव से तर जाए, भवतारण वह पतवार दे।.. वीणापाणि मां शारदे, स्वर में मेरे झंकार दे। हे वर्णमातृका भगवती, मेरे शब्दों को श्रृंगार दे।। रघुवीर तिवारी योगी 0 Your uotein ।। सरस्वती वंदना / वीणापाणि मां शारदे स्वर में मेरे झंकार दे। हे वर्णमातृका भगवती, मेरे शब्दों को श्रृंगार दे।।  लेखनी लिखे सत्य सदा, मन निर्झर सा हो निर्मल। कमल आसनी मेरा जीवन कर दे पुष्प जलज सा उज्जवल। मेरे जीवन में सदैव सद्गुण की अनुपम बहार दे।.. वीणापाणि मा शारदे, स्वर में मेरे झंकार दे।। वर दे हंस वाहिनी मां सही गलत में भेद कर सकूं।  इतना मां साहस भी देना, सत्य सदा अभिव्यक्त कर सकूं। अवगुण खोटापन काट सके, मां लेखन में इतनी धार दे।॰. वीणापाणि मां शारदे स्वर में मेरे झंकार दे।। जब मन में घोर निराशा हो, आशा की राह दिखा देना। थक चूर यदि मैं सो जाऊं देकर स्फूर्ति जगा देना।  सबके मन से द्वेष हटा, अनुपम सबको मात प्यार दे। वीणापाणि मां शारदे स्वर में मेरे झंकार दे।। मेरे जीवन का दीप बुझेपर शब्दों का दीप न बुझ पाए। देशप्रेम भक्ति- मानवता समता की जो राह दिखाए। योगी भव से तर जाए, भवतारण वह पतवार दे।.. वीणापाणि मां शारदे, स्वर में मेरे झंकार दे। हे वर्णमातृका भगवती, मेरे शब्दों को श्रृंगार दे।। रघुवीर तिवारी योगी 0 Your uotein - ShareChat