ShareChat
click to see wallet page
search
#हमारी जिंदगी #मेरी डायरी #मेरे अल्फाज
हमारी जिंदगी - 49 जीवन सत्य लोहा नरम होकर औ़ज़ार बन जाता है। सोना नरम होकर जेवर बन जाता है। मिट्ठी नरम होकर खेत बन जाती है। होता है तो रोटी बन जाती है। आटा नरम तरह इंसान भी नरम हो जाए तो; ठीक इसी लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेता है। a 49 जीवन सत्य लोहा नरम होकर औ़ज़ार बन जाता है। सोना नरम होकर जेवर बन जाता है। मिट्ठी नरम होकर खेत बन जाती है। होता है तो रोटी बन जाती है। आटा नरम तरह इंसान भी नरम हो जाए तो; ठीक इसी लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेता है। a - ShareChat