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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - बहुत है मुझमें झुकने 57 का मग़र हर चौखट पर सज़दा करूं ये गवारा नहीं ,| मुझे बहुत है मुझमें झुकने 57 का मग़र हर चौखट पर सज़दा करूं ये गवारा नहीं ,| मुझे - ShareChat