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"हो राज्य प्राप्त क्या पाएगा? कर-गत क्या धन लाएगा? बहु विभव-हेतु ललचाना क्या? अपनी गरिमा को खोना क्या? प्रासादों के कनकाभ शिखर, होते कबूतरों के ही घर, महलों में गरुड़ न होता है, कंचन पर कभी न सोता है, बसता वह कहीं पहाड़ों में, शैलों की फटी दरारों में। होकर समृद्ध-सुख के आधीन, मानव होता नित तप-क्षीण, सत्ता, किरीट, मणिमय आसन, करते मनुष्य का तेज हरण, नर विभव हेतु ललचाता है, पर वही मनुज को खाता है।" #whatsapp status #🎭Whatsapp status #👌प्रेरणादायी स्टेट्स #🙂Positive Thought #🙂सत्य वचन