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मुंडेश्वरी देवी मंदिर: एक विलोभनीय चमत्कार बिहारच्या कैमूर जिल्ह्यातील मुंडेश्वरी देवी मंदिर हे भारतातील सर्वात प्राचीन मंदिरांपैकी एक मानले जाते, ज्याचा इतिहास साधारणतः इ.स. १०८ पर्यंत जातो. या मंदिराचे सर्वात मोठे वैशिष्ट्य म्हणजे येथील 'अहिंसक बळी' प्रथा. पूजेदरम्यान जेव्हा बकऱ्याला देवीसमोर आणले जाते, तेव्हा पुजारी मंत्रोच्चार करून त्यावर अक्षता (तांदूळ) अर्पण करतात. असे मानले जाते की, मंत्रांच्या प्रभावाने तो बकरा काही काळासाठी बेशुद्ध होतो, जणू त्याचा जीव गेला आहे. मात्र, पूजा संपन्न होताच पुन्हा तांदूळ शिंपडताच तो बकरा जिवंत होऊन उठून उभा राहतो. रक्ताचा एकही थेंब न सांडता पार पडणारी ही विस्मयकारक परंपरा भाविकांच्या श्रद्धेचे आणि भारतीय संस्कृतीतील चमत्काराचे एक अजोड प्रतीक आहे. 🙏🏻 #✍️ विचार
✍️ विचार - बिहार | कैमूर जिले में मुंडेश्वरी देवी भारत का सबसे ಹ पुराना मंदिर (कथित तौर पर १०८ ईस्वी ) है। यहाँ देवी को बकरे की बलि चढाई जाती है लेकिन बकरे को मारा नहीं बकरे को मूर्ति के सामने लिटाते हैं और उस जाता। पुजारी ' पर मंत्रों वाले चावल फेँकते हैं। बकरा तुरंत बेहोश हो जाता है जैसे मर गया हो। पूजा खत्म होने के बाद दोबारा चावल फेँकते ही वह जिंदा होकर खडा हो जाता है। बिना खून बहाए बलि देने का यह चमत्कार दुनिया में कहीं और नहीं होता। बिहार | कैमूर जिले में मुंडेश्वरी देवी भारत का सबसे ಹ पुराना मंदिर (कथित तौर पर १०८ ईस्वी ) है। यहाँ देवी को बकरे की बलि चढाई जाती है लेकिन बकरे को मारा नहीं बकरे को मूर्ति के सामने लिटाते हैं और उस जाता। पुजारी ' पर मंत्रों वाले चावल फेँकते हैं। बकरा तुरंत बेहोश हो जाता है जैसे मर गया हो। पूजा खत्म होने के बाद दोबारा चावल फेँकते ही वह जिंदा होकर खडा हो जाता है। बिना खून बहाए बलि देने का यह चमत्कार दुनिया में कहीं और नहीं होता। - ShareChat