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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - रोज़गार पढ़ लिख कर सोचा था मां-बाप का मान बढ़ाऊंँगा जिन्होंने दिया सब कुछ उनका कर्ज चुकाऊंगा लेकिन नेताओं के किए गए वादे अब लग रहे हैं जुमले ज्यादे इनके चक्करों में फंस जाते हैं युवा बेचारे सीधे-साधे बिगुल बजना चाहिए मग़र अब एक स्वर में आवाज उठनी चाहिए भीख नहीं , अधिकार चाहिए बेरोजगार हूं , रोज़गार चाहिए संगम सिंह रोज़गार पढ़ लिख कर सोचा था मां-बाप का मान बढ़ाऊंँगा जिन्होंने दिया सब कुछ उनका कर्ज चुकाऊंगा लेकिन नेताओं के किए गए वादे अब लग रहे हैं जुमले ज्यादे इनके चक्करों में फंस जाते हैं युवा बेचारे सीधे-साधे बिगुल बजना चाहिए मग़र अब एक स्वर में आवाज उठनी चाहिए भीख नहीं , अधिकार चाहिए बेरोजगार हूं , रोज़गार चाहिए संगम सिंह - ShareChat