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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कहीं पर ग़म कहीं सरगम ये कुदरत के ही तो नज़ारे है , प्यासे तो वो भी रह जाते हैं घर जिनके दरिया किनारे होते हैं , Ravi khairnar कहीं पर ग़म कहीं सरगम ये कुदरत के ही तो नज़ारे है , प्यासे तो वो भी रह जाते हैं घर जिनके दरिया किनारे होते हैं , Ravi khairnar - ShareChat