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🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹🤹 समझदारी की बात दो ही लोग कर सकते हैं एक वो जिनकी उम्र बहुत ज़्यादा हो और एक वो जिन्होंने ने बहुत कम उम्र में बुरा वक़्त देखा हो। तूने तो समझदार बना दिया ऐ ज़िन्दगी कितना ख़ुश रहते थे जब हम नादान थे ये जिम्मेदारी, ये समझदारी कितनी माँस आहारी होती है ना इन्सान का अच्छा खासा बचपन, मस्ती अल्हड़पन सब खा जाती है कितना अच्छा था वो बचपन उसमें जिम्मेदारियां कहाँ थीं तूने खाया या नहीं खाया ये पूछने वाली केवल माँ थी। 🤹 सुप्रभात 🤹 #❤️जीवन की सीख