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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - तुम नहीं समझ पाओगे उस दर्द की हक़ीक़त, [ 7' जिसमें पहले पाने की फ़िर भूल जाने की दुआ की जाए, | तुम नहीं समझ पाओगे उस दर्द की हक़ीक़त, [ 7' जिसमें पहले पाने की फ़िर भूल जाने की दुआ की जाए, | - ShareChat