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वायरल न्यूज - डीएलएड वालों को अतिरिक्त अवसर देने का आदेश रद्द हिरासत में मौत पर बनाए मुआवजा कानियमः कोर्ट हाईकोर्ट राज्य सरकार पर बाध्यकारी हैं।इसलिए नियमावली में संशोधन के बिना राज लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बॅंच ने हिरासत में मौत पर मृतक परिवार को मुआवजा  विधि सरकारडीएलएडअभ्यरथियोंकोपरीक्षाम संवाददाता| प्रयागराज, देने  गाइडलाइन बनाने का आदेश राज्य सरकार को दिया ह। कोर्ट ने पीलीभीत के एक इलाहाबादहाईकोर्टनेकहाहेकिकिसो बैठनेका अतिरिक्तअवसरनहोंदेसकती मामले में मृतक बंदी के परिवार को दस लाख का मुआवजा तीन सप्ताह में देने का अवैध आदेश के आधार पर अन्यलोगों हे।खंडपीठनेएकल पोठके उस आदेश आदेश दिया है | न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ़, मंजीव शुक्ला की खंडपीट ने पीलीभीत को रद्द कर दिया हे जिसमें को समान लाभ नहा दियाजा सकता । ؟٩ ٦ | अप्राकृतिक मृत्यु कुछ 71 u6 जिला जेल में याची के नाबालिग बेटे की आदेश पारित किया। कोर्टने कहा कि संविधान के अनुच्छेद अभ्यर्थियोंको अतिर्त अवसर देने के गया है तो अन्य लोग उसी आधार पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति महेश चंद्र १४ केतहत नकारात्मकसमानता का आधार पर अन्यको भो अवसर देने का त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह समान लाभ का दावा नहों कर सकते।  कोई सिद्घांत नहीं है। यदि किसी को आदेश दिया गया था। अपर महाधिवक्ता अनूपत्रिवेदीनेराज्यसरकारकापक्षरखा।  गलतीयानियमोंकेविरुद्धलाभदेदिया  राज्य सरकार को विशेष अपील ओर कोखंडपीठनेकहाकिएनसीटीईकेनियम डीएलएड वालों को अतिरिक्त अवसर देने का आदेश रद्द हिरासत में मौत पर बनाए मुआवजा कानियमः कोर्ट हाईकोर्ट राज्य सरकार पर बाध्यकारी हैं।इसलिए नियमावली में संशोधन के बिना राज लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बॅंच ने हिरासत में मौत पर मृतक परिवार को मुआवजा  विधि सरकारडीएलएडअभ्यरथियोंकोपरीक्षाम संवाददाता| प्रयागराज, देने  गाइडलाइन बनाने का आदेश राज्य सरकार को दिया ह। कोर्ट ने पीलीभीत के एक इलाहाबादहाईकोर्टनेकहाहेकिकिसो बैठनेका अतिरिक्तअवसरनहोंदेसकती मामले में मृतक बंदी के परिवार को दस लाख का मुआवजा तीन सप्ताह में देने का अवैध आदेश के आधार पर अन्यलोगों हे।खंडपीठनेएकल पोठके उस आदेश आदेश दिया है | न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ़, मंजीव शुक्ला की खंडपीट ने पीलीभीत को रद्द कर दिया हे जिसमें को समान लाभ नहा दियाजा सकता । ؟٩ ٦ | अप्राकृतिक मृत्यु कुछ 71 u6 जिला जेल में याची के नाबालिग बेटे की आदेश पारित किया। कोर्टने कहा कि संविधान के अनुच्छेद अभ्यर्थियोंको अतिर्त अवसर देने के गया है तो अन्य लोग उसी आधार पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति महेश चंद्र १४ केतहत नकारात्मकसमानता का आधार पर अन्यको भो अवसर देने का त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह समान लाभ का दावा नहों कर सकते।  कोई सिद्घांत नहीं है। यदि किसी को आदेश दिया गया था। अपर महाधिवक्ता अनूपत्रिवेदीनेराज्यसरकारकापक्षरखा।  गलतीयानियमोंकेविरुद्धलाभदेदिया  राज्य सरकार को विशेष अपील ओर कोखंडपीठनेकहाकिएनसीटीईकेनियम - ShareChat