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ओम नमः शिवाय #ओम नमः शिवाय #ओम नमः शिवाय #ओम नमः शिवाय #🕉️:ओम नमः शिवाय 🙏🙏
ओम नमः शिवाय - सबसे बड़ा योगी कौन, सन्यासी या गृहस्थ, साधना के दोनों मार्ग उचित हैं, दोनों की बड़ी महत्ता है लेकिन शिव बड़े योगी हैं, भगवान श्रीकृष्ण बड़े योगी हैं, भगवान राम बड़े योगी हैं, अगर समान रूप में समानता की तो गृहस्थ बड़े योगी होगें , और यह सन्यासी भी मानते हैं, योग का uIUTf ' मतलब है निरंतर ध्यान और विकारों का उच्च स्तर तक शमन करके अधिकतम स्तर तक सरल हो जाना, भगवान शिव सबसे बड़े गृहस्थ हैं, उनका भरा पूरा परिवार है, शिव शक्ति कार्तिकेय गणपति, और शिव सबसे बड़े योगी क्यों हैं क्योंकि वह हर समय अपने इष्ट के ध्यान में मगन रहते हैं, और शक्ति अपने इष्ट शिव के ध्यान में मगन रहती हैं, आज तक न कोई शिव की लीला जान पाया न शक्ति की, लेकिन जितना उजागर है वही साधारण जीव को दिव्य बनाने के पर्याप्त है, शिव जी ने माता पार्वती को सीधे से प्यार भरे वचन कहे, "उमा लिए  कहउँ मैं अनुभव अपना। सत हरि भजनु जगत् सब सपना।। ब्रह्मांड के सबसे बड़े योगी देवों के देव महादेव कह रहे हैं कि सत हरि भजन, तो आप स्वयं समझ सकते हैं कि अपने इष्ट का नाम जप कितनी बड़ी साधना है,अनवरत मानसिक नाम जप से बड़ी कोई साधना नहीं, आप चाहें गृहस्थ हों या सन्यासी, और अगर कम नहीं हुए ' नहीं हुए, साधना से आपके विकार उच्चतम स्तर तक आप सरल तो फिर आपको सोचने की जरूरत है, सबसे बड़ा योगी कौन, सन्यासी या गृहस्थ, साधना के दोनों मार्ग उचित हैं, दोनों की बड़ी महत्ता है लेकिन शिव बड़े योगी हैं, भगवान श्रीकृष्ण बड़े योगी हैं, भगवान राम बड़े योगी हैं, अगर समान रूप में समानता की तो गृहस्थ बड़े योगी होगें , और यह सन्यासी भी मानते हैं, योग का uIUTf ' मतलब है निरंतर ध्यान और विकारों का उच्च स्तर तक शमन करके अधिकतम स्तर तक सरल हो जाना, भगवान शिव सबसे बड़े गृहस्थ हैं, उनका भरा पूरा परिवार है, शिव शक्ति कार्तिकेय गणपति, और शिव सबसे बड़े योगी क्यों हैं क्योंकि वह हर समय अपने इष्ट के ध्यान में मगन रहते हैं, और शक्ति अपने इष्ट शिव के ध्यान में मगन रहती हैं, आज तक न कोई शिव की लीला जान पाया न शक्ति की, लेकिन जितना उजागर है वही साधारण जीव को दिव्य बनाने के पर्याप्त है, शिव जी ने माता पार्वती को सीधे से प्यार भरे वचन कहे, "उमा लिए  कहउँ मैं अनुभव अपना। सत हरि भजनु जगत् सब सपना।। ब्रह्मांड के सबसे बड़े योगी देवों के देव महादेव कह रहे हैं कि सत हरि भजन, तो आप स्वयं समझ सकते हैं कि अपने इष्ट का नाम जप कितनी बड़ी साधना है,अनवरत मानसिक नाम जप से बड़ी कोई साधना नहीं, आप चाहें गृहस्थ हों या सन्यासी, और अगर कम नहीं हुए ' नहीं हुए, साधना से आपके विकार उच्चतम स्तर तक आप सरल तो फिर आपको सोचने की जरूरत है, - ShareChat