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#@सच्ची बातें
@सच्ची बातें - एक घर बनाते बनाते जिंदगी बीत जाती है, और जब वो बनकर तैयार होता है॰॰. तो उसमें जीने की उम्र हरी कम रह जाती ह्रै 1 ईटनईट जोड़ते हुए हम अपने ही अरमानों को टालते जाते हैं, "आज नहीं... कल सही " कहते ्कहते साल गुज़र जाते हैं ؟ छत त्तौ मिल जाती है सिर पर, पर सुकून कहीं रास्तों में छूट जाता है, और जिस घर के लिए जीते हैं पूरी उम्र. उसी में जीने का वक़्त कम पड़ जाता है... riter _ mahendra एक घर बनाते बनाते जिंदगी बीत जाती है, और जब वो बनकर तैयार होता है॰॰. तो उसमें जीने की उम्र हरी कम रह जाती ह्रै 1 ईटनईट जोड़ते हुए हम अपने ही अरमानों को टालते जाते हैं, "आज नहीं... कल सही " कहते ्कहते साल गुज़र जाते हैं ؟ छत त्तौ मिल जाती है सिर पर, पर सुकून कहीं रास्तों में छूट जाता है, और जिस घर के लिए जीते हैं पूरी उम्र. उसी में जीने का वक़्त कम पड़ जाता है... riter _ mahendra - ShareChat