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newsinshort - कोर्ट का वाट्सअप को भारत छोड़ने की चेतावनी ரிர नयी दिल्ली ( एजेंसी ) एन्क्रिप्शन हटाने को कहा गया तो हम  सवाल यह है कि अचानक अदालत भारत में इतनी सख्त क्यों हुई ? क्योंकि  शायद ही कोई ऐसा स्मार्टफोन यूजर  भारत से एग्जिट लेंगे, क्योंकि कोई दूसरा रास्ता नहीं बचाँ ह॰ लेकिन ये होे जो वाट्सअप इस्तेमाल न करता हो॰ @pravesh मैसेज, कॉल ऑफिस का काम मामला दूसरा है. आइए जानते हें॰ फैमिली गरुप यहां तक कि सरकारी इस विवाद की जड़ है वाट्सअप মুননাব  लेकिन की॰  प्राइवेसी पॉलिसी॰   वाट्सअप यही भी॰ 3|4 कोर्ट के कटघरे में सालों सेयह कहता आ रहा है कि॰ सुप्रीम वाटसअप उसके मैसेज इंड- टू- इंड इंक्रीप्टेड हैं और जिजों के शब्दों में खडा है नाराजगी साफ दिख रही है॰ और कोई तीसरा शख्स उन्हें नहों ক্ক हाल   ही॰में कोर्ट  ने सकता. लेकिन समस्या मैसेज सुप्रीम कंटेंट की नहीं, बल्कि यूजर डेटा को वाट्सअप और उसकी पेरेंट कंपनी है. वाट्सअप अपनी नई पॉलिसी में यह  मेटा को साफ चेतावनी दी॰ अदालत ने कहा कि नागरिकों की प्राइवेसी के साफ करता है कि वह यूजर का मेटाडेटा, यानी किससे बात हुई, कब अधिकार क साथ कोई कंपनी खेल महीने पहले कोर्ट में वाट्सअप ने खुद  नहीं सकती॰ यहां तक कहा गया कि॰ हुई, कितनी बार हुई, डिवाइस को अगर नियम नहीं मान सकते तो भारत सख्त टिप्पणी की जानकारी  तकनीकी ही 1. और दूसरी  एक शी खुला  वॉट्सऐप ने एक मामले की सुनवाई  डिटेल्स मेटा की बाकी कंपनियों, ভাভন কা নিকচল্প हे में कहा था कि अगर हमें एंड टु एंड  यह कोई मामूली टिप्पणी नहीं है॰ ( शेष पृष्ठ ९ पर ) कोर्ट का वाट्सअप को भारत छोड़ने की चेतावनी ரிர नयी दिल्ली ( एजेंसी ) एन्क्रिप्शन हटाने को कहा गया तो हम  सवाल यह है कि अचानक अदालत भारत में इतनी सख्त क्यों हुई ? क्योंकि  शायद ही कोई ऐसा स्मार्टफोन यूजर  भारत से एग्जिट लेंगे, क्योंकि कोई दूसरा रास्ता नहीं बचाँ ह॰ लेकिन ये होे जो वाट्सअप इस्तेमाल न करता हो॰ @pravesh मैसेज, कॉल ऑफिस का काम मामला दूसरा है. आइए जानते हें॰ फैमिली गरुप यहां तक कि सरकारी इस विवाद की जड़ है वाट्सअप মুননাব  लेकिन की॰  प्राइवेसी पॉलिसी॰   वाट्सअप यही भी॰ 3|4 कोर्ट के कटघरे में सालों सेयह कहता आ रहा है कि॰ सुप्रीम वाटसअप उसके मैसेज इंड- टू- इंड इंक्रीप्टेड हैं और जिजों के शब्दों में खडा है नाराजगी साफ दिख रही है॰ और कोई तीसरा शख्स उन्हें नहों ক্ক हाल   ही॰में कोर्ट  ने सकता. लेकिन समस्या मैसेज सुप्रीम कंटेंट की नहीं, बल्कि यूजर डेटा को वाट्सअप और उसकी पेरेंट कंपनी है. वाट्सअप अपनी नई पॉलिसी में यह  मेटा को साफ चेतावनी दी॰ अदालत ने कहा कि नागरिकों की प्राइवेसी के साफ करता है कि वह यूजर का मेटाडेटा, यानी किससे बात हुई, कब अधिकार क साथ कोई कंपनी खेल महीने पहले कोर्ट में वाट्सअप ने खुद  नहीं सकती॰ यहां तक कहा गया कि॰ हुई, कितनी बार हुई, डिवाइस को अगर नियम नहीं मान सकते तो भारत सख्त टिप्पणी की जानकारी  तकनीकी ही 1. और दूसरी  एक शी खुला  वॉट्सऐप ने एक मामले की सुनवाई  डिटेल्स मेटा की बाकी कंपनियों, ভাভন কা নিকচল্প हे में कहा था कि अगर हमें एंड टु एंड  यह कोई मामूली टिप्पणी नहीं है॰ ( शेष पृष्ठ ९ पर ) - ShareChat