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Raghaw Shekhar - Author on ShareChat
Raghaw Shekhar
6K views • 4 months ago
#khud #khud ka dard khud se jyada koi nhi samajh sakta

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  • Misthi - Author on ShareChat
    Misthi
    ##khudgarz #bade khudgarz hote hai ham💯🤎 #khudgarz Zindagi
    #खुदगर्ज़_ मैं जब से चालीस के पार हुई हूँ थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ अब अपना सारा समय अपनों पर नहीं लुटाती उसमें से कुछ पल खुद के लिए भी चुराती हूँ हूँ रसोई में काम करते हुए সুননী Earphones লা कोई मनपसंद संगीत, पुरानी कोई गज़ल या गीत बिस्तर पर जाने से पहले हाथ में लेती हूँ कुछ देर पढ़ने के लिए वो किताब जो न जाने कब से पढ़ने की इच्छा थी पर घर के काम काज में उलझी कभी पढ न सकी ढले चली जाती हूँ कभी शाम अपने कॉफी कप के साथ छत पर घूंट घूंट पीती हूँ डूबते सूरज की सौंदर्य कॉफी के साथ साथ किसी पुराने मित्र के घर जाकर যা चाय के साथ गपशप कर आती हूँ जब से चालीस के पार हुई हूँ थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ अब मेरी रसोई में नहीं बनता केवल बाकी लोगों की फ़रमाइश पर खाना किसी किसी दिन जो मुझे खाने मन हो वो भी क पकाती हूं थोड़ा खयाल अब खुद की इच्छाओं का भी रखती 8 देखती हूँ दोपहर के खाली समय में सब्जी काटते हुए बरसों से बनी पड़ी watchlist में से कोई पसंदीदा फिल्म मितव्ययी थी जो मैं फीजूलखरची कर लेती हूँ कभी कभी अब कर लेती हूँ online order करने बस मन पर कोई ग़ैरजरूरी चीज़ भी जब से चालीस के पार हुई हूँ थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ सब कहते हैं मैं अब पहले सी नहीं रही बहुत बदल गयी हूँ मैं सोचती हूँ वक्त रहते संभल गयी हूँ वरना शायद मनचीता सब करने से रह जाता रेत सा मुट्ठी से और वक्त फिसल जाता और हथेलियों पर अफसोस के सिवा कुछ न बच UIdT #खुदगर्ज़_ मैं जब से चालीस के पार हुई हूँ थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ अब अपना सारा समय अपनों पर नहीं लुटाती उसमें से कुछ पल खुद के लिए भी चुराती हूँ हूँ रसोई में काम करते हुए সুননী Earphones লা कोई मनपसंद संगीत, पुरानी कोई गज़ल या गीत बिस्तर पर जाने से पहले हाथ में लेती हूँ कुछ देर पढ़ने के लिए वो किताब जो न जाने कब से पढ़ने की इच्छा थी पर घर के काम काज में उलझी कभी पढ न सकी ढले चली जाती हूँ कभी शाम अपने कॉफी कप के साथ छत पर घूंट घूंट पीती हूँ डूबते सूरज की सौंदर्य कॉफी के साथ साथ किसी पुराने मित्र के घर जाकर যা चाय के साथ गपशप कर आती हूँ जब से चालीस के पार हुई हूँ थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ अब मेरी रसोई में नहीं बनता केवल बाकी लोगों की फ़रमाइश पर खाना किसी किसी दिन जो मुझे खाने मन हो वो भी क पकाती हूं थोड़ा खयाल अब खुद की इच्छाओं का भी रखती 8 देखती हूँ दोपहर के खाली समय में सब्जी काटते हुए बरसों से बनी पड़ी watchlist में से कोई पसंदीदा फिल्म मितव्ययी थी जो मैं फीजूलखरची कर लेती हूँ कभी कभी अब कर लेती हूँ online order करने बस मन पर कोई ग़ैरजरूरी चीज़ भी जब से चालीस के पार हुई हूँ थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ सब कहते हैं मैं अब पहले सी नहीं रही बहुत बदल गयी हूँ मैं सोचती हूँ वक्त रहते संभल गयी हूँ वरना शायद मनचीता सब करने से रह जाता रेत सा मुट्ठी से और वक्त फिसल जाता और हथेलियों पर अफसोस के सिवा कुछ न बच UIdT
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  • Simple_soul - Author on ShareChat
    Simple_soul😊
    #selfmade #khud
    selfmade, khud
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  • subhash jha - Author on ShareChat
    subhash jha
    #खुद#का अध्ययन# अंतर्मन#🌺
    खुद, का अध्ययन
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  • subhash jha - Author on ShareChat
    subhash jha
    #खुदकी समझ#🌺
    खुदकी समझ
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  • subhash jha - Author on ShareChat
    subhash jha
    #खुद से न भटके#🌺🕉️🌺
    खुद से न भटके
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  • ~ηѕι!! - Author on ShareChat
    ~𝚲ηѕι!!🫀
    #khud
    मांगते होंगे लोग खुदा से बहुत कुछ हमने तो सिर्फ अपने लिए मौत मांगी है ...
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  • beard King - Author on ShareChat
    beard King
    #khud #ka
    khud, ka
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  • Manisha Verma - Author on ShareChat
    Manisha Verma
    #khud par itna bharosa h...🤘😎
    khud par itna bharosa h...
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    1K
  • parmod. Chavat - Author on ShareChat
    parmod. Chavat
    #खुद
    खुद की काबिलियत पर भरोसा रख जो गलती आज की है उससे सीख मत मांग किसी के आगे अपनी सफलता के लिए भीख तू जलता हुआ रेगिस्तान है तेरे अंदर कुछ करने की ठान है करना कुछ महान है तू रुक मत तुझे तू अपने घर वालों की आस है उनकी उम्मीदों की सांस है इनको यूं ही नहीं जाया करना है अपनी सफलता के लिए लडना है..!! तुझे . खुद की काबिलियत पर भरोसा रख जो गलती आज की है उससे सीख मत मांग किसी के आगे अपनी सफलता के लिए भीख तू जलता हुआ रेगिस्तान है तेरे अंदर कुछ करने की ठान है करना कुछ महान है तू रुक मत तुझे तू अपने घर वालों की आस है उनकी उम्मीदों की सांस है इनको यूं ही नहीं जाया करना है अपनी सफलता के लिए लडना है..!! तुझे .
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