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ठीक 12 बज रहे थे। भारत-पाक सीमा पर ठंडी हवाएँ ऐसे चल रही थीं जैसे कोई अनदेखी परछाईं रेत को सहला रही हो। दूर-दूर तक सिर्फ सन्नाटा… और बीच-बीच में चौकी की टिमटिमाती पीली लाइट। राजस्थान के थार इलाके में तैनात था जवान अर्जुन सिंह। उम्र सिर्फ 26 साल। बहादुर, ईमानदार और अपने परिवार का इकलौता बेटा। गाँव से निकलकर देश की रक्षा का सपना लेकर वह फौज में आया था। उस रात उसकी ड्यूटी पोस्ट नंबर 17 पर थी — एक पुरानी चौकी, जिसके बारे में अफवाह थी कि वहाँ पहले भी कई अजीब घटनाएँ हो चुकी हैं। 🌑 पहली आहट रात 12:30… अर्जुन ने अपने नाइट विज़न दूरबीन से चारों तरफ देखा। सब कुछ सामान्य था। तभी उसे लगा जैसे दूर रेत के टीले के पीछे कोई खड़ा है। “कौन है वहाँ?” उसने ऊँची आवाज़ में पूछा। कोई जवाब नहीं। रेत उड़ती रही… हवा सिसकती रही… लेकिन अचानक उसे साफ दिखाई दिया — एक धुंधली आकृति। सफेद कपड़ों में कोई औरत… जिसके बाल हवा में उड़ रहे थे। अर्जुन का दिल जोर से धड़कने लगा। सीमा पर इस समय कोई महिला? असंभव। उसने वायरलेस उठाया — “अल्फा टू ब्रावो, क्या आपको भी पोस्ट 17 के पास कोई मूवमेंट दिख रही है?” दूसरी तरफ से जवाब आया — “निगेटिव अर्जुन, सब क्लियर है।” लेकिन अर्जुन की आँखों के सामने वह आकृति धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी। 👣 पदचिन्ह जो अचानक गायब हो गए अर्जुन ने हिम्मत जुटाई और आगे बढ़ा। जैसे-जैसे वह पास गया, आकृति धुंध में बदल गई। वहाँ सिर्फ रेत थी… और कुछ पदचिन्ह। पर अजीब बात यह थी कि पदचिन्ह बीच में ही खत्म हो गए — जैसे कोई हवा में उड़ गया हो। अर्जुन के माथे पर पसीना आ गया। उसे याद आया — तीन साल पहले इसी पोस्ट पर तैनात एक जवान की रहस्यमय मौत हुई थी। रिपोर्ट में लिखा गया था — “हार्ट अटैक”। लेकिन साथियों ने कहा था कि वह मरने से पहले चिल्ला रहा था — “वो फिर आ गई…!” 📻 टूटी हुई आवाज़ रात 2 बजे… चौकी के अंदर रखी पुरानी रेडियो मशीन अचानक खुद-ब-खुद चालू हो गई। उसमें से खड़खड़ाती आवाज़ आई — “मुझे… घर… जाना है…” अर्जुन ने घबराकर स्विच बंद किया। लेकिन आवाज़ फिर आई — “तुम… भी… नहीं बचोगे…” अर्जुन ने तुरंत पूरी चौकी की तलाशी ली। कोई नहीं था। 🕯️ रहस्य की परत सुबह होते ही अर्जुन ने अपने सीनियर सूबेदार मेजर से बात की। पहले तो उन्होंने टाल दिया, लेकिन जब अर्जुन ने सब विस्तार से बताया, तो उनका चेहरा उतर गया। उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा — “आज से 5 साल पहले यहाँ एक गाँव था। सीमा विवाद में गोलाबारी हुई। एक परिवार मारा गया… उस परिवार की एक लड़की की लाश कभी नहीं मिली। लोग कहते हैं उसकी आत्मा यहीं भटकती है।” अर्जुन हँसना चाहता था — पर पिछली रात की घटना ने उसकी हँसी रोक दी। 🌪️ दूसरी रात – सच्चाई का सामना अर्जुन ने ठान लिया — आज वह सच्चाई जाने बिना नहीं रहेगा। रात 1 बजे… वही ठंडी हवा… वही सन्नाटा। अचानक पीछे से किसी ने उसका नाम फुसफुसाया — “अर्जुन…” वह पलटा — वही सफेद कपड़ों वाली लड़की, इस बार बिल्कुल सामने। उसकी आँखें खाली थीं… चेहरा पीला… और पैरों के नीचे रेत नहीं हिल रही थी। “तुम यहाँ क्यों हो?” अर्जुन ने साहस जुटाकर पूछा। लड़की की आवाज़ धीमी थी — “मेरे परिवार को बचा नहीं पाए… अब तुम भी नहीं बचोगे…” अचानक हवा तेज हो गई। चौकी की लाइट झपकने लगी। अर्जुन ने मंत्र याद किया जो उसकी माँ ने सिखाया था। उसने जोर से कहा — “मैं देश की रक्षा करता हूँ, किसी का बुरा नहीं किया!” लड़की का चेहरा बदलने लगा। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। “मुझे न्याय चाहिए…” अर्जुन समझ गया — यह बदले की आत्मा नहीं, दर्द की आत्मा है। ⚖️ न्याय की तलाश अगले दिन अर्जुन ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले। उसे पता चला कि उस घटना में असल में गाँव पर दुश्मन देश की तरफ से हमला हुआ था, लेकिन रिपोर्ट में सच्चाई छुपा दी गई थी। अर्जुन ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों तक भेजी। तीसरी रात… लड़की फिर आई। लेकिन इस बार उसका चेहरा शांत था। “धन्यवाद… अब मुझे मुक्ति मिलेगी…” और धीरे-धीरे वह रेत में घुल गई। 🌅 आख़िरी मोड़ सुबह जब साथी जवान अर्जुन को जगाने आए — वह चौकी के बाहर बैठा था… मुस्कुराते हुए। लेकिन उसकी आँखें बंद थीं। दिल की धड़कन रुक चुकी थी। डॉक्टर ने कहा — “हार्ट फेलियर।” पर उसके चेहरे पर डर नहीं… सुकून था। उस दिन के बाद पोस्ट 17 पर कभी कोई अजीब घटना नहीं हुई। गाँव में अर्जुन की मूर्ति लगी — “वो जवान जिसने सीमा ही नहीं, एक भटकी आत्मा को भी सुकून दिया।” और आज भी जब रात में हवा चलती है, तो ऐसा लगता है जैसे कोई फुसफुसा रहा हो — “जय हिंद…” #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🎖️देश के सिपाही #🎖️देश के जांबाज #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🙏 जवानों को सलाम @ sahiba 🥰
I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 - सीमा पर दुश्मन से नहीं... उस रात वो किसी और से लड़ रहा था... पोस्ट नंबर १७ की आख़िरी ड्यूटी ; जय हिंद सीमा पर दुश्मन से नहीं... उस रात वो किसी और से लड़ रहा था... पोस्ट नंबर १७ की आख़िरी ड्यूटी ; जय हिंद - ShareChat