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#⛳रघुपति राघव राजा राम🙏
⛳रघुपति राघव राजा राम🙏 - Il श्री राम स्तुति ]l 6 श्री राम चंद्र कृपालु भजमन, हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्। | कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्। | भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।  रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्। । सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं। आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं। ।  इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्। । ٦ मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों । ೯ಫ್ करुना निधान सुजान  सनेहू जानत रावरो।।  एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।  भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली। ।  तुलसी  মীবষা जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।  मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे। Panotbookcom Il श्री राम स्तुति ]l 6 श्री राम चंद्र कृपालु भजमन, हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्। | कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्। | भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।  रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्। । सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं। आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं। ।  इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्। । ٦ मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों । ೯ಫ್ करुना निधान सुजान  सनेहू जानत रावरो।।  एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।  भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली। ।  तुलसी  মীবষা जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।  मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे। Panotbookcom - ShareChat