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जय सर्वजन समाज जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #पंचक
पंचक - पञ्चकअवधि Shashu ٩ क SHASHWAT THE ETER NAL TRUTH cternalmin दिसम्बर २०२५ पञ्चक आरंभ ~ ०७:४६ पी एम २४ दिसम्बर २०२५, बुधवार पञ्चक अंत~ ~9 २९ दिसम्बर २०२५, सोमवार ०७:४१ ए एम ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पञ्चक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पञ्चकों को जन्म देता है। अर्थात पञ्चक के अंतर्गत धनिष्ठा , शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को 'पञ्चक' कहा जाता है। पञ्चक की ५ दिनों की अशुभ अवधि को माङ्गलिक कार्यों हेतु वर्जित माना जाता है। (*द्रिक पञ्चाङ्ग नई दिल्ली , भारत के अनुसार) पञ्चकअवधि Shashu ٩ क SHASHWAT THE ETER NAL TRUTH cternalmin दिसम्बर २०२५ पञ्चक आरंभ ~ ०७:४६ पी एम २४ दिसम्बर २०२५, बुधवार पञ्चक अंत~ ~9 २९ दिसम्बर २०२५, सोमवार ०७:४१ ए एम ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पञ्चक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पञ्चकों को जन्म देता है। अर्थात पञ्चक के अंतर्गत धनिष्ठा , शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को 'पञ्चक' कहा जाता है। पञ्चक की ५ दिनों की अशुभ अवधि को माङ्गलिक कार्यों हेतु वर्जित माना जाता है। (*द्रिक पञ्चाङ्ग नई दिल्ली , भारत के अनुसार) - ShareChat