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#news #वायरल न्यूज
news - बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा और मुखाग्नि जासं  मढ़ौरा ( सारण ) घंटों दराजे पर पड़ा रहा मां का शव बेटियां हाथ जोड़ मांगती रही मदद बिहार में सारण जिले के जवईनियां गांव परिवार के मुखिया का ম্ বুকা  देहांत T ने की घटी घटन समाज से जूझ  संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर आर्थिक तंगी रहा परिवार दिए हैं। यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि उस सामाजिक जिम्मेदारी पर सवालिया निशान लगा उपेक्षा का उदाहरण है॰ जहां गरीबी और दिया। शव घंटों घर के दरवाजे पर पड़ा अकेलेपन के कारण मृत्यु के बाद भी॰ लेकिन   कंधा  देने के लिए न रहा रिश्तेदार पहुंचे और न ही गांव के लोग सम्मानजनक विदाई नसीब नहीं होती। गांव निवासी रविन्द्र सिंह की पत्नी आगे आए। दोनों बेटियां गांव की गलियों  =-= बबीता   देवी पटना में उपचार के भटकती   रहीं॰ हाथ जोड़कर क दौरान निधन हो गया। इससे करीब डेढ़ मदद की गुहार लगाती रहीं लेकिन कोई वर्ष पूर्व परिवार के मुखिया रविन्द्र सिंह सामने नहीं आया। शुक्रवार को काफी देर  बाद दो-्तीन लोगों के पहुंचने पर किसी का भी देहांत हो चुका था। पिता की 9 ক परिवार आर्थिक तंगी तरह अंतिम संस्कार संभव हो॰ सका। d मां की अर्थी को कंधा देतीं बेटियां | TTTTTT 47 मजबूरी में दोनों बेटियों ने ही मां की सामाजिक उपेक्षा रहा था। किसी रस्में पूरी  सामाजिक सहयोग न मिलने से गुरुवार  देकर तरह उस समय क्रियाकर्म को अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि देने की गई थीं॰ लेकिन मां के उपचार में बेटों का दायित्व निभाया। तक क्रिया भी॰ नहीं उठ पाई थी। इस मुखाग्नि  घटना को दैनिक जागरण द्वारा प्रमुखता  वाली बेटी मौसम सिंह ने बताया कि॰ परिवार की बची खुची पूंजी भी समाप्त से प्रकाशित किए जाने के बाद समाज हाे गई। बबीता देवी के निधन के बाद आर्थिक अभाव के कारण मां के श्राद संस्कार के दौरान जो स्थिति और क्रियाकर्म को लेकर वे परंपरा और और परिवार के अन्य लोग हरकत में 3ITT उसने गांव की सामूहिक  बीच   फंसी   हुई सामने आई मजबूरी ক  থা | आप। बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा और मुखाग्नि जासं  मढ़ौरा ( सारण ) घंटों दराजे पर पड़ा रहा मां का शव बेटियां हाथ जोड़ मांगती रही मदद बिहार में सारण जिले के जवईनियां गांव परिवार के मुखिया का ম্ বুকা  देहांत T ने की घटी घटन समाज से जूझ  संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर आर्थिक तंगी रहा परिवार दिए हैं। यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि उस सामाजिक जिम्मेदारी पर सवालिया निशान लगा उपेक्षा का उदाहरण है॰ जहां गरीबी और दिया। शव घंटों घर के दरवाजे पर पड़ा अकेलेपन के कारण मृत्यु के बाद भी॰ लेकिन   कंधा  देने के लिए न रहा रिश्तेदार पहुंचे और न ही गांव के लोग सम्मानजनक विदाई नसीब नहीं होती। गांव निवासी रविन्द्र सिंह की पत्नी आगे आए। दोनों बेटियां गांव की गलियों  =-= बबीता   देवी पटना में उपचार के भटकती   रहीं॰ हाथ जोड़कर क दौरान निधन हो गया। इससे करीब डेढ़ मदद की गुहार लगाती रहीं लेकिन कोई वर्ष पूर्व परिवार के मुखिया रविन्द्र सिंह सामने नहीं आया। शुक्रवार को काफी देर  बाद दो-्तीन लोगों के पहुंचने पर किसी का भी देहांत हो चुका था। पिता की 9 ক परिवार आर्थिक तंगी तरह अंतिम संस्कार संभव हो॰ सका। d मां की अर्थी को कंधा देतीं बेटियां | TTTTTT 47 मजबूरी में दोनों बेटियों ने ही मां की सामाजिक उपेक्षा रहा था। किसी रस्में पूरी  सामाजिक सहयोग न मिलने से गुरुवार  देकर तरह उस समय क्रियाकर्म को अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि देने की गई थीं॰ लेकिन मां के उपचार में बेटों का दायित्व निभाया। तक क्रिया भी॰ नहीं उठ पाई थी। इस मुखाग्नि  घटना को दैनिक जागरण द्वारा प्रमुखता  वाली बेटी मौसम सिंह ने बताया कि॰ परिवार की बची खुची पूंजी भी समाप्त से प्रकाशित किए जाने के बाद समाज हाे गई। बबीता देवी के निधन के बाद आर्थिक अभाव के कारण मां के श्राद संस्कार के दौरान जो स्थिति और क्रियाकर्म को लेकर वे परंपरा और और परिवार के अन्य लोग हरकत में 3ITT उसने गांव की सामूहिक  बीच   फंसी   हुई सामने आई मजबूरी ক  থা | आप। - ShareChat