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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ #...જય‌ શ્રી રામ...
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - श्री रामचरित मानस चौपाई श्री गुर पद नख मनि गन जोती सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती II মলন মীক্ক নম মী মসক্কামু बड़े भाग उर आवइ जासू II भावार्थः- श्री गुरु महाराज के चरण ्नखों की ज्योति मणियों के प्रकाश के समान है जिसके स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। वह प्रकाश  अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करने वाला है, वह जिसके हृदय में आ जाता है, उसके बड़े भाग्य हैं Il श्री रामचरित मानस चौपाई श्री गुर पद नख मनि गन जोती सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती II মলন মীক্ক নম মী মসক্কামু बड़े भाग उर आवइ जासू II भावार्थः- श्री गुरु महाराज के चरण ्नखों की ज्योति मणियों के प्रकाश के समान है जिसके स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। वह प्रकाश  अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करने वाला है, वह जिसके हृदय में आ जाता है, उसके बड़े भाग्य हैं Il - ShareChat