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##मेरी जिंदगी कि हकीकत
#मेरी जिंदगी कि हकीकत - स्त्री को कभी मायके से वंचित लिए मत करना। उसके मायका एक दवाखाना है। जहाँ से उसकी हर बीमारी दूर हो जाती है। सारी थकान उतर जाती है। बाबुल की गलियों में कदम रखते ही वह रिचार्ज हो जाती है। वहाँ उसकी बचपन से लेकर जवानी तक की मिठी यादें बसी होती है। सखी सहेलियाँ, माता पिता, भाई बहन, उसका वो संसार जिसमे उसकी जान बसती है। जिन्हे भूलना खुद को खोने जैसा है..! स्त्री को कभी मायके से वंचित लिए मत करना। उसके मायका एक दवाखाना है। जहाँ से उसकी हर बीमारी दूर हो जाती है। सारी थकान उतर जाती है। बाबुल की गलियों में कदम रखते ही वह रिचार्ज हो जाती है। वहाँ उसकी बचपन से लेकर जवानी तक की मिठी यादें बसी होती है। सखी सहेलियाँ, माता पिता, भाई बहन, उसका वो संसार जिसमे उसकी जान बसती है। जिन्हे भूलना खुद को खोने जैसा है..! - ShareChat