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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ #...જય‌ શ્રી રામ...
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - 0 8 श्री रामचरित मानस चौपाई 97 आलसहूँ कुभायँ अनख नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ II মী নাম যাম যুন যাথা  सुमिरि যঘুনাথক্কি মাথা Il 3 7I5 अच्छे भाव (प्रेम ) से, बुरे भाव (वैर ) से, ক্কীখ ম যা সালমে ম, কিমী নফক্ক ম ৪ী নাম  जपने से दसों दिशाओं में कल्याण होता है। उसी ( परम कारी ) राम नाम का स्मरण करके और কযোতা श्री रघुनाथ जी को मस्तक नवाकर मैं राम जी के गुणों का वर्णन करता हूँ II 0 8 श्री रामचरित मानस चौपाई 97 आलसहूँ कुभायँ अनख नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ II মী নাম যাম যুন যাথা  सुमिरि যঘুনাথক্কি মাথা Il 3 7I5 अच्छे भाव (प्रेम ) से, बुरे भाव (वैर ) से, ক্কীখ ম যা সালমে ম, কিমী নফক্ক ম ৪ী নাম  जपने से दसों दिशाओं में कल्याण होता है। उसी ( परम कारी ) राम नाम का स्मरण करके और কযোতা श्री रघुनाथ जी को मस्तक नवाकर मैं राम जी के गुणों का वर्णन करता हूँ II - ShareChat