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#❤️अस्सलामु अलैकुम
❤️अस्सलामु अलैकुम - कभी किस्मत से समझौता , तो कभी मेहनत को आज़माना पड़ता है; टूटकर बिखरने से पहले, खुद को समेटना पडता है; की नहीं, ये खुशी हर मुस्कान क्या जाने; दुनिया ये ज़िन्दगी है साहब, यहाँ अकेले ही सब कुछ निभाना पड़ता है।। कभी किस्मत से समझौता , तो कभी मेहनत को आज़माना पड़ता है; टूटकर बिखरने से पहले, खुद को समेटना पडता है; की नहीं, ये खुशी हर मुस्कान क्या जाने; दुनिया ये ज़िन्दगी है साहब, यहाँ अकेले ही सब कुछ निभाना पड़ता है।। - ShareChat