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#🙏रामायण🕉
🙏रामायण🕉 - ' राम , विरह भरत मन भारी , निशिदिन रटत नाम सुखकारी । पादुका शीश धरी मुसुकाहीं , राम प्रेम सम और कछु नाहीं ॥ VAANT - ShareChat