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#❤️जीवन की सीख #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️जीवन की सीख - Il 125 Il मूर्खस्तु परिहर्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः।  भिनत्ति वाक्यशूलेन अदृश्यं कण्टकं यथा ।l   व्यक्ति रहना चाहिए मूर्ख क्योंकि वह मनुष्य के रूप में दो पैरों वाला पशु होता हे। वह अपने  कठोर और कटु शब्दों से वैसे ही पहुँचाता है जैसे अदृश्य काँटा  चोट चुभकर दर्द देता है।" चाणक्य नीति [ Il 125 Il मूर्खस्तु परिहर्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः।  भिनत्ति वाक्यशूलेन अदृश्यं कण्टकं यथा ।l   व्यक्ति रहना चाहिए मूर्ख क्योंकि वह मनुष्य के रूप में दो पैरों वाला पशु होता हे। वह अपने  कठोर और कटु शब्दों से वैसे ही पहुँचाता है जैसे अदृश्य काँटा  चोट चुभकर दर्द देता है।" चाणक्य नीति [ - ShareChat