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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - मैं वो दरिया हूं कि हर बूंद समन्दर है जिसकी, | अच्छा ही किया নুসন किनारा करके, | मुझसे मैं वो दरिया हूं कि हर बूंद समन्दर है जिसकी, | अच्छा ही किया নুসন किनारा करके, | मुझसे - ShareChat