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osho - संभोग से समाधि. ओशो কাম ক ৪ণা ম, मैथुन ক ৪ণা ম, मन विचारों से शुन्य हो जाता है। एक क्षणा को मन के सारे विचार रूक जाते हैं। यही ठहराव, यही शुन्यता आंनद की वर्षा का कारण है। संभोग से समाधि. ओशो কাম ক ৪ণা ম, मैथुन ক ৪ণা ম, मन विचारों से शुन्य हो जाता है। एक क्षणा को मन के सारे विचार रूक जाते हैं। यही ठहराव, यही शुन्यता आंनद की वर्षा का कारण है। - ShareChat