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#☝ मेरे विचार #🌞 Good Morning🌞
☝ मेरे विचार - मनुष्य का प्रारब्ध {( एक आदमी ने नारदमुनि से पूछा मेरे भाग्य में कितना  नारदमुनि ने कहा - 8೯ ? भगवान विष्णु से पूछकर नारदमुनि ने कहा- रोज तुम्हारे কল লনাব্তযা | १ रुपया भाग्य में है | आदमी बहुत खुश रहने लगा, उसकी जरूरते 1 रूपये ्में पूरी हो जाती थी| एक दिन उसके मित्र ने कहा में तुम्हारे सादगी जीवन खुश देखकर बहुत प्रभावित हुआ हूं और अपनी ओर बहन की शादी करना चाहता हू तुमसे  आदमी ने कहा मेरी कमाई 1 रुपया रोज की है इसको ध्यान में रखना। इसी में से ही गुजर बसर  बहन को | मित्र ने कहा कोई बात नहीं करना पड़ेगा तुम्हारी मुझे रिश्ता मंजूर है। नारदमुनि से अगले दिन से उस आदमी की कमाई १ १ रुपया हो गई| उसने  पूछा की हे मुनिवर मेरे भाग्य में 1 रूपया लिखा है फिर १ १ रुपये क्यो मिल रहे है ? नारदमुनि ने कहा- तुम्हारा किसी से रिश्ता या सगाई हुई है क्या? हाँ ಕ್ಕಕಾ उसने जवाब दिया| तो यह १० रुपये उसके भाग्य के मिल रहे तुमको সীভনা  विवाह रमें काम आएँगे - इसको  नारद जी ने जवाब शुरू करो तुम्हारे दिया 4 एक दिन उसकी पत्नी गर्भवती हुई और उसकी कमाई ३१ रूपये होने लगी। पि उसने नारदमुनि से पूछा है मुनिवर मेरी और मेरी पत्नी के भाग्य के ११ रूपये मि रहे थे लेकिन अभी ३१ रूपये क्यों मिल रहे है। क्या मै कोई अपराध कर रहा ने कहा- यह तेरे बच्चे के भाग्य के २० किसी त्रुटिवश ये हो रहा हे ? সুনিব मिल रहे हे। हर मनुष्य को उसका प्रारब्ध (भाग्य ) मिलता है। किसके भाग्य से घर में थन दौलत आती है हमको नहीं पता। लेकिन मनुष्य अहंकार करता है कि मैने बनाया र्मैँने कमाया , मेरा है, मेरी मेहनत है, मै कमा रहा हूँ, मेरी वजह से हो रहा है। मगर वास्तव में किसी को पता नर्ही की हम किसके भाग्य का खा रहे है इसलिए अपर्न उपलब्धि्यों पर अहंकार कभी नर्हीं करना चाहिए मनुष्य का प्रारब्ध {( एक आदमी ने नारदमुनि से पूछा मेरे भाग्य में कितना  नारदमुनि ने कहा - 8೯ ? भगवान विष्णु से पूछकर नारदमुनि ने कहा- रोज तुम्हारे কল লনাব্তযা | १ रुपया भाग्य में है | आदमी बहुत खुश रहने लगा, उसकी जरूरते 1 रूपये ्में पूरी हो जाती थी| एक दिन उसके मित्र ने कहा में तुम्हारे सादगी जीवन खुश देखकर बहुत प्रभावित हुआ हूं और अपनी ओर बहन की शादी करना चाहता हू तुमसे  आदमी ने कहा मेरी कमाई 1 रुपया रोज की है इसको ध्यान में रखना। इसी में से ही गुजर बसर  बहन को | मित्र ने कहा कोई बात नहीं करना पड़ेगा तुम्हारी मुझे रिश्ता मंजूर है। नारदमुनि से अगले दिन से उस आदमी की कमाई १ १ रुपया हो गई| उसने  पूछा की हे मुनिवर मेरे भाग्य में 1 रूपया लिखा है फिर १ १ रुपये क्यो मिल रहे है ? नारदमुनि ने कहा- तुम्हारा किसी से रिश्ता या सगाई हुई है क्या? हाँ ಕ್ಕಕಾ उसने जवाब दिया| तो यह १० रुपये उसके भाग्य के मिल रहे तुमको সীভনা  विवाह रमें काम आएँगे - इसको  नारद जी ने जवाब शुरू करो तुम्हारे दिया 4 एक दिन उसकी पत्नी गर्भवती हुई और उसकी कमाई ३१ रूपये होने लगी। पि उसने नारदमुनि से पूछा है मुनिवर मेरी और मेरी पत्नी के भाग्य के ११ रूपये मि रहे थे लेकिन अभी ३१ रूपये क्यों मिल रहे है। क्या मै कोई अपराध कर रहा ने कहा- यह तेरे बच्चे के भाग्य के २० किसी त्रुटिवश ये हो रहा हे ? সুনিব मिल रहे हे। हर मनुष्य को उसका प्रारब्ध (भाग्य ) मिलता है। किसके भाग्य से घर में थन दौलत आती है हमको नहीं पता। लेकिन मनुष्य अहंकार करता है कि मैने बनाया र्मैँने कमाया , मेरा है, मेरी मेहनत है, मै कमा रहा हूँ, मेरी वजह से हो रहा है। मगर वास्तव में किसी को पता नर्ही की हम किसके भाग्य का खा रहे है इसलिए अपर्न उपलब्धि्यों पर अहंकार कभी नर्हीं करना चाहिए - ShareChat