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#परमेश्वर का वादा #यीशु
परमेश्वर का वादा - २. सेवा और परोपकार का आनंद सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि आत्मा का शुद्धिकरण है। निस्वार्थ भावः "जब आप ক আাঁসু दूसरों  पोँछते हैं, तो आपके अपने दुखों का भार हल्का हो जाता है।" विनम्रताः सच्चा ज्ञानी वह है जो जितना अधिक जानता है, उतना ही अधिक झुकता है। जैसे सागर सबसे गहरा होता है, इसलिए वह सबसे नीचे स्थित होता है और सारी नदियाँ उसी में आकर मिलती हैं। २. सेवा और परोपकार का आनंद सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि आत्मा का शुद्धिकरण है। निस्वार्थ भावः "जब आप ক আাঁসু दूसरों  पोँछते हैं, तो आपके अपने दुखों का भार हल्का हो जाता है।" विनम्रताः सच्चा ज्ञानी वह है जो जितना अधिक जानता है, उतना ही अधिक झुकता है। जैसे सागर सबसे गहरा होता है, इसलिए वह सबसे नीचे स्थित होता है और सारी नदियाँ उसी में आकर मिलती हैं। - ShareChat