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✍️ साहित्य एवं शायरी - मगहर जाने का हठ छोड़ो, काशी ही में मरो कबीर। आडम्बर के संधि पत्र पर हस्ताक्षर अब करो कबीर। मत बोलो मुल्ला को मुर्गा , पंडित को झूठा मत बोलो। जाए जिधर बावरी दुनिया  तुम भी दुनिया के संग हो लो। दुनिया बोलेगी 'ओ कहाँ चला बावरो कबीर ! वरना सतगुरु की महिमा को छोड़ो देखो जग ! है स्वार्थ मुख्य सत। व्यस्त रहो बस अर्थ-लोभ में गूढ़ ज्ञान की बात करो मत।  अपनी सारी उलटबांसियां अपने सिर ही धरो कबीर।  अभी चेत जाओ तो अच्छा नही बाद में पछताओगे। कोई नही जलाएगा घर रह जाओगे। लिए लुकाठी থ্রীভা  सा तो डरो कबीर। अपने निपट अकेलेपन से घर में होंगे तंगी के दिन जब बेटी का ब्याह रचेगा| लोई तब ताना मारेगी और कमाल भी गाली देगा। दुनिया की दौलत से अपनी खाली झोली भरो कबीर।  उपेंद्र बाजपेई उपेन्द्र बाजपेई भाई #सृजन_ फिर_से मगहर जाने का हठ छोड़ो, काशी ही में मरो कबीर। आडम्बर के संधि पत्र पर हस्ताक्षर अब करो कबीर। मत बोलो मुल्ला को मुर्गा , पंडित को झूठा मत बोलो। जाए जिधर बावरी दुनिया  तुम भी दुनिया के संग हो लो। दुनिया बोलेगी 'ओ कहाँ चला बावरो कबीर ! वरना सतगुरु की महिमा को छोड़ो देखो जग ! है स्वार्थ मुख्य सत। व्यस्त रहो बस अर्थ-लोभ में गूढ़ ज्ञान की बात करो मत।  अपनी सारी उलटबांसियां अपने सिर ही धरो कबीर।  अभी चेत जाओ तो अच्छा नही बाद में पछताओगे। कोई नही जलाएगा घर रह जाओगे। लिए लुकाठी থ্রীভা  सा तो डरो कबीर। अपने निपट अकेलेपन से घर में होंगे तंगी के दिन जब बेटी का ब्याह रचेगा| लोई तब ताना मारेगी और कमाल भी गाली देगा। दुनिया की दौलत से अपनी खाली झोली भरो कबीर।  उपेंद्र बाजपेई उपेन्द्र बाजपेई भाई #सृजन_ फिर_से - ShareChat