ShareChat
click to see wallet page
search
#तत्वदर्शी सन्त के उपदेश #भजन_करने_का_सहीं_ढंग... भजन अर्थात् भक्ति करने का सहीं तरीका,सहीं विधि क्या हैं ? पवित्र पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद में बताया गया हैं कि काशी करौंत काहे लेही,बिना भजन नहीं ढंग रे। कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है,करो साध सत्संग रे।। मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। इसी का समर्थन श्रीमद्भगवद्गीता भी करती है :- तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। इस संबंध में और अधिक जानकारी हेतु सपरिवार देखिए साधना टीवी चैनल अभी।
तत्वदर्शी सन्त के उपदेश - ঠালা ৪ী কুভুয়ু , ೪33- नह्ां पाया काशी करौंत काहे लेही  बिना भजन नर्ही ढग रे। कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है , साध सत्संग रे।। రెగాా मोक्ष ग्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। इसी का समर्थन श्रीमद्भगवदगीता भी करती हैः तद्विद्धि ग्रणिपातेन परिग्रश्नेन सेवया। उस परम ज्ञान को जानने के लिए तत्वदर्शी संत के TT s1311, 3್ दंडवत ग्रणाम करो और निष्कपट भाव से सेवा करो। Sant Rampal J YOUTUBE IItg Tud  Maharal CHANNEL TKV2E ঠালা ৪ী কুভুয়ু , ೪33- नह्ां पाया काशी करौंत काहे लेही  बिना भजन नर्ही ढग रे। कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है , साध सत्संग रे।। రెగాా मोक्ष ग्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। इसी का समर्थन श्रीमद्भगवदगीता भी करती हैः तद्विद्धि ग्रणिपातेन परिग्रश्नेन सेवया। उस परम ज्ञान को जानने के लिए तत्वदर्शी संत के TT s1311, 3್ दंडवत ग्रणाम करो और निष्कपट भाव से सेवा करो। Sant Rampal J YOUTUBE IItg Tud  Maharal CHANNEL TKV2E - ShareChat