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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - *किसको बर्दाश्त है " साहब" तरक़्क़ी आजकल की. दूसरों भीड़ लोग तो अर्थीकी देखकर भी जल जाते है..!* *किसको बर्दाश्त है " साहब" तरक़्क़ी आजकल की. दूसरों भीड़ लोग तो अर्थीकी देखकर भी जल जाते है..!* - ShareChat