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#लोगों के लिए सीख
लोगों के लिए सीख - बुद्ध की बुद्धिमानी तथागत (गौतम बुद्ध) किसी गांव के रास्ते जा रहे थे। उन्हें एक समय की बात है ! गांव के कुछ लोग उनके पास आए। उनकी वेशभूषा देखकर उनका उपहास देखकर करने लगे। तथागत ने कहा, ्यदि आप लोगों की बात समाप्त हो गई हो, तो मैं यहां से जाऊं। मुझे स्थान पर भी पहुंचना है। ' दूसरे  बुद्ध की बात सुनकर वह ग्रामीण हैरान थे। वह गौतम बुद्ध से बोले, " हमने आपका  भी नहीं हुए।  इतना अपमान किया और आप சி से सुख " तब बुद्ध ने कहा, "मुझे अपमान से दुःख नहीं होता और स्वागत भी नहीं होता है। इसीलिए मैं वही करूंगा जो मेंने पिछले गांव में किया था। " ग्रामीण ने पूछा, ' आपने पिछले गांव में ऐसा क्या किया था? एक "पिछले गांव में कुछ लोग फल-फूल, मिठाइयां लेकर आए थे। तब तब तथागत बोले, मैंने उनसे कहा था कि मेरा पेट भरा हुआ है। मुझे माफ करो। तब मैंने उन्हें वह फल किए, वापस लौटा दिए थे | इस तरह आपने मुझे अपशब्द भेंट तो मैं वापस इन्हें आपको लौटाता हूं॰" प्रेरणा- जीवन में वही बात ग्रहण करें , जो ग्रहण करने योग्य है। सीखः बुद्ध के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि हमें बाहरी परिस्थितियों , जैसे कि अपमान या प्रशंसा , से प्रभावित नहीं होना चाहिए। हमें अपनी आंतरिक शांति बनाए रखनी चाहिए और केवल सकारात्मक और अच्छी   चीजों को ही अपने जीवन में शामिल करना चाहिए। नकारात्मकता को उसी तरह अस्वीकार जैसे बुद्ध  ने अपशब्दों को अस्वीकार कर दिया। कर देना चाहिए लिए हमारे पेज से जुड़ने के फॉलो करना न भूले < 35 बुद्ध की बुद्धिमानी तथागत (गौतम बुद्ध) किसी गांव के रास्ते जा रहे थे। उन्हें एक समय की बात है ! गांव के कुछ लोग उनके पास आए। उनकी वेशभूषा देखकर उनका उपहास देखकर करने लगे। तथागत ने कहा, ्यदि आप लोगों की बात समाप्त हो गई हो, तो मैं यहां से जाऊं। मुझे स्थान पर भी पहुंचना है। ' दूसरे  बुद्ध की बात सुनकर वह ग्रामीण हैरान थे। वह गौतम बुद्ध से बोले, " हमने आपका  भी नहीं हुए।  इतना अपमान किया और आप சி से सुख " तब बुद्ध ने कहा, "मुझे अपमान से दुःख नहीं होता और स्वागत भी नहीं होता है। इसीलिए मैं वही करूंगा जो मेंने पिछले गांव में किया था। " ग्रामीण ने पूछा, ' आपने पिछले गांव में ऐसा क्या किया था? एक "पिछले गांव में कुछ लोग फल-फूल, मिठाइयां लेकर आए थे। तब तब तथागत बोले, मैंने उनसे कहा था कि मेरा पेट भरा हुआ है। मुझे माफ करो। तब मैंने उन्हें वह फल किए, वापस लौटा दिए थे | इस तरह आपने मुझे अपशब्द भेंट तो मैं वापस इन्हें आपको लौटाता हूं॰" प्रेरणा- जीवन में वही बात ग्रहण करें , जो ग्रहण करने योग्य है। सीखः बुद्ध के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि हमें बाहरी परिस्थितियों , जैसे कि अपमान या प्रशंसा , से प्रभावित नहीं होना चाहिए। हमें अपनी आंतरिक शांति बनाए रखनी चाहिए और केवल सकारात्मक और अच्छी   चीजों को ही अपने जीवन में शामिल करना चाहिए। नकारात्मकता को उसी तरह अस्वीकार जैसे बुद्ध  ने अपशब्दों को अस्वीकार कर दिया। कर देना चाहिए लिए हमारे पेज से जुड़ने के फॉलो करना न भूले < 35 - ShareChat