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लगभग मान ही चुका था मैं मृत्यु के अंतिम तर्क को कि तुम आए और कुछ इस तरह रखा फैलाकर जीवन के जादू का भोला-सा इंद्रजाल कि लगा यह प्रस्ताव ज़रूर सफल होगा। ग़लतियाँ ही ग़लतियाँ थी उसमें हिसाब-किताब की, फिर भी लगा गलियाँ ही गलियाँ हैं उसमें अनेक संभावनाओं की बस, हाथ भर की दूरी पर है, वह जिसे पाना है। ग़लती उसी दूरी को समझने में थी। #📄 ਜੀਵਨ ਬਾਣੀ #🎥ਵਾਇਰਲ ਸਟੋਰੀ ਅਪਡੇਟਸ 📰 #📗ਸ਼ਾਇਰੀ ਅਤੇ ਕੋਟਸ 🧾 #📃ਲਾਈਫ ਕੋਟਸ✒️ #🧾 ਟੈਕਸਟ ਸ਼ਾਇਰੀ
📄 ਜੀਵਨ ਬਾਣੀ - बस, हाथ भर की दूरी पर है, वह जिसे पाना है। ग़लती उसी दूरी को समझने में थी। हिन्दीनामा कुँवर नारायण बस, हाथ भर की दूरी पर है, वह जिसे पाना है। ग़लती उसी दूरी को समझने में थी। हिन्दीनामा कुँवर नारायण - ShareChat