अरावली में एक जेसीबी चलाने वाला युवक था—
हाथ में मशीन, सामने अडिग पहाड़।
उसने बिना हिचक कहा,
“मैं अरावली को नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा।”
न उसने भाषण दिए,
न कोई नारे लगाए—
बस अपनी अंतरात्मा की आवाज़ मानी।
उसके इस एक कदम ने
कई और मनों को झकझोर दिया।
उसे देखकर
दूसरे ड्राइवर भी आगे आए
और सबने मिलकर
खुदाई करने से मना कर दिया।
वह न कोई नेता था,
न कोई बड़ा अधिकारी—
वे साधारण मेहनतकश लोग थे,
जिन्होंने साबित कर दिया कि
देश सिर्फ़ सत्ता से नहीं,
ज़मीर से चलता है।
आज के समय में,
जब पहाड़ों को तोड़ा जा रहा है,
जंगल उजाड़े जा रहे हैं
और नदियाँ सूखती जा रही हैं,
ऐसे लोग
हमें उम्मीद की राह दिखाते हैं।
शायद यही सच्ची देशभक्ति है—
जब इंसान कहता है:
“कमाई से पहले धरती।”
🙏 ऐसे लोगों को मेरा नमन।
अगर आपको भी लगता है
कि अरावली को बचाना ज़रूरी है,
तो इस संदेश को आगे बढ़ाइए,
ताकि यह आवाज़
और लोगों तक पहुँच सके। भारत बचाओ आंदोलन
#अरावली बचाओ


