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#@@@ #एक_ब्रह्मांड कबीर साहेब जी ने काल के एक ब्रह्मांड की सर्व व्यवस्था बताई कि काल के एक ब्रह्मांड में स्वर्ग लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक के अतिरिक्त ब्रह्मा का लोक, विष्णु लोक (बैकुण्ठ), शिवलोक, ब्रह्मलोक (महास्वर्ग), देवी दुर्गा का लोक, धर्मराज का लोक, इंद्र का लोक, सप्तपुरी, गोलोक, चाँद, सूर्य, नौ ग्रह, 9 लाख तारे (गैलेक्सी), 88 हजार ऋषि मंडल, 33 करोड़ देव स्थान, 96 करोड़ मेघमाला आदि विद्यमान हैं। @highlight #SantRampalJiMaharaj
@@@ - "; झंगारीिक  सत्य पुत्त्य निवास लोक के अन्दर में रहने बालों का मर्ग ٦٦؟ ٩»«١؟ & 1 প্রিঘী अररयण & নন্পমীক্ ম মনা " & எர்# নম লীক  % मान सरावर कमती  का सीक नम्ढ यनर मंजुपी ~ सददा  [ श्रय लोक स्त्ततिक जाने মচম ক্রমল স वाली का मार्ग केवल एक हजार ज्योति दिखाई देती है॰ पह श्षी सत्पपुरी  आठव कमत कोवी नयामी  { l का मा्ग = 1=4|~757 हजार खेड़े यानि अठासी ஈரி =ர = वारियों को नगरियां চানং] বচরণ  -7 निरेनो, दरी तिन जाने है। पार्ना कामिर्यों सो नगाोरों ने जात e॰ वारी ग़रना मर्मरान से लोक को जात  सागने खम राह रह ऐ जो अव तोक को जारा है। ঘযা নাক साप पुमम का रथान यानि কা সান तरिकुटी कमल का सर्फद भान काल का स्थान यानि नमुनुर का लोक मानि परमेहहर तथा बका নিব্রুূতী কসল কা सव गुढ केै रुप ह चिराजनान रहते है॰ भागा इस कमल की काता पर्री बिकुरी कलताते है। दो पंछुडी है बिकुटी यह HH है। वास् बिकुटी कमल एक प्रप्परण्द सरस्वती है। तीन दगठ कमल पर शर्मराज खल जाल में ক   লিম 72 नामी कमल  (सुन्चर परियो) रखी मसुर आवाज में स्वय स्वाद कमल तथा सब उवशिया भी अर्मनग्न शरीर में विवरण  मर्न्नीं भव्ती की कटिन परिआा होती बाता हि। राई एवकन र्गात हें। यर्वा पर अः "; झंगारीिक  सत्य पुत्त्य निवास लोक के अन्दर में रहने बालों का मर्ग ٦٦؟ ٩»«١؟ & 1 প্রিঘী अररयण & নন্পমীক্ ম মনা " & எர்# নম লীক  % मान सरावर कमती  का सीक नम्ढ यनर मंजुपी ~ सददा  [ श्रय लोक स्त्ततिक जाने মচম ক্রমল স वाली का मार्ग केवल एक हजार ज्योति दिखाई देती है॰ पह श्षी सत्पपुरी  आठव कमत कोवी नयामी  { l का मा्ग = 1=4|~757 हजार खेड़े यानि अठासी ஈரி =ர = वारियों को नगरियां চানং] বচরণ  -7 निरेनो, दरी तिन जाने है। पार्ना कामिर्यों सो नगाोरों ने जात e॰ वारी ग़रना मर्मरान से लोक को जात  सागने खम राह रह ऐ जो अव तोक को जारा है। ঘযা নাক साप पुमम का रथान यानि কা সান तरिकुटी कमल का सर्फद भान काल का स्थान यानि नमुनुर का लोक मानि परमेहहर तथा बका নিব্রুূতী কসল কা सव गुढ केै रुप ह चिराजनान रहते है॰ भागा इस कमल की काता पर्री बिकुरी कलताते है। दो पंछुडी है बिकुटी यह HH है। वास् बिकुटी कमल एक प्रप्परण्द सरस्वती है। तीन दगठ कमल पर शर्मराज खल जाल में ক   লিম 72 नामी कमल  (सुन्चर परियो) रखी मसुर आवाज में स्वय स्वाद कमल तथा सब उवशिया भी अर्मनग्न शरीर में विवरण  मर्न्नीं भव्ती की कटिन परिआा होती बाता हि। राई एवकन र्गात हें। यर्वा पर अः - ShareChat