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bhakti - गीता अध्याय श्लोक 7 15 co तमगुण शिव जी रजगुण ब्रह्मा , सतगुण रूपी त्रिगुणमई माया की साधना से होने वाले क्षणिक लाभ पर ही आश्रित हैँ अन्य  साधना नहीं करना चाहते अर्थात् त्रिगुणमई माया के द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा ி चुका है जो मेरी अर्थात् ब्रह्म साधना भी नहीं करते , इन्हीं तीनों देवताओँ तक सीमित रहते हैं ऐसे आसुर स्वभावको धारण किये हुए मनुष्यों में नीच दूषित कर्म करनेवाले  मूर्ख मुझको नहीं भजते अर्थात् वे तीनों " की साधना ही करते रहते हैँ। गुणों  38:3& जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज fl SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ गीता अध्याय श्लोक 7 15 co तमगुण शिव जी रजगुण ब्रह्मा , सतगुण रूपी त्रिगुणमई माया की साधना से होने वाले क्षणिक लाभ पर ही आश्रित हैँ अन्य  साधना नहीं करना चाहते अर्थात् त्रिगुणमई माया के द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा ி चुका है जो मेरी अर्थात् ब्रह्म साधना भी नहीं करते , इन्हीं तीनों देवताओँ तक सीमित रहते हैं ऐसे आसुर स्वभावको धारण किये हुए मनुष्यों में नीच दूषित कर्म करनेवाले  मूर्ख मुझको नहीं भजते अर्थात् वे तीनों " की साधना ही करते रहते हैँ। गुणों  38:3& जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज fl SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat