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#भगवत गीता #भगवत गीता श्लोक #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
भगवत गीता - सर्वद्वारेषु देहेडस्मिन्प्रकाश उपजायते। विद्याद्विवृद्ध सत्त्वमित्यूत।l ज्ञान यदा तदा जिस समय इस देह में तथा अन्तःकॅरण और इन्द्रियों में चेतनता और विवेक शक्ति उत्पत्न होती हैउस समय ऐसा जानना चाहिए कि सत्त्वगरुण बढ़ा है Illll a: चेतना , और विवेक की वृद्धि से। जब मनुष्य के मन बुद्रि और इन्द्रियों में स्पष्टता , समझ और ज्ञान का संचार होता है तोयह संकेत हैकि उसमें सत्त्वगूण की वृद्रिहो रहीहै। सत्त्वगुण वह गुण हैजो शाति पवित्रता , औ सामंजस्यका प्रतीक हैl इस श्लोक के माध्यम सियह बताया गया है कि सत्त्वगुण की प्रधानता के समय मनुष्य के विचार कर्म और दृष्टिकोण मे स्पष्टता और शुद्धता ऑ जाती है। उसके विवेकशीलता में वृद्धि होतीह जिसॅसे चह सही ओर गलत का भेद स्पष्ट रूपसेॅकर पाता है। इस अवस्था में व्यक्ति की चितना उन्नत होती है॰ और वह जीवन के सत्य को समझने की दिशा में अग्रसर होता हैl संक्षेप मेः जब हमारे भीतर ज्ञान और विवेक का प्रकाश प्रकट होता है और हमारे मन और इन्द्रियाँ शुद्ध और स्पष्ट होजाती हैं तब समझना चाहिए कि हिमारे भीतर सत्त्वगुण का विस्तार हो रहा हा यह सत्त्वगृण ही हैजो हमे उच्चतर चतना और आंतरिक शातिकी ओरलेजाता हैl सर्वद्वारेषु देहेडस्मिन्प्रकाश उपजायते। विद्याद्विवृद्ध सत्त्वमित्यूत।l ज्ञान यदा तदा जिस समय इस देह में तथा अन्तःकॅरण और इन्द्रियों में चेतनता और विवेक शक्ति उत्पत्न होती हैउस समय ऐसा जानना चाहिए कि सत्त्वगरुण बढ़ा है Illll a: चेतना , और विवेक की वृद्धि से। जब मनुष्य के मन बुद्रि और इन्द्रियों में स्पष्टता , समझ और ज्ञान का संचार होता है तोयह संकेत हैकि उसमें सत्त्वगूण की वृद्रिहो रहीहै। सत्त्वगुण वह गुण हैजो शाति पवित्रता , औ सामंजस्यका प्रतीक हैl इस श्लोक के माध्यम सियह बताया गया है कि सत्त्वगुण की प्रधानता के समय मनुष्य के विचार कर्म और दृष्टिकोण मे स्पष्टता और शुद्धता ऑ जाती है। उसके विवेकशीलता में वृद्धि होतीह जिसॅसे चह सही ओर गलत का भेद स्पष्ट रूपसेॅकर पाता है। इस अवस्था में व्यक्ति की चितना उन्नत होती है॰ और वह जीवन के सत्य को समझने की दिशा में अग्रसर होता हैl संक्षेप मेः जब हमारे भीतर ज्ञान और विवेक का प्रकाश प्रकट होता है और हमारे मन और इन्द्रियाँ शुद्ध और स्पष्ट होजाती हैं तब समझना चाहिए कि हिमारे भीतर सत्त्वगुण का विस्तार हो रहा हा यह सत्त्वगृण ही हैजो हमे उच्चतर चतना और आंतरिक शातिकी ओरलेजाता हैl - ShareChat