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#✍ आदर्श कोट्स #☝ मेरे विचार #✍️ साहित्य एवं शायरी #🌸 सत्य वचन #📒 मेरी डायरी
✍ आदर्श कोट्स - प्यास दरिया की निगाहों से छुपा रक्खी है एक बादल से बड़ी आस लगा रक्खी है तेरी आँखों की कशिश कैसे समझाऊँ तुझे इन चराग़ों ने मिरी नींद उड़ा रक्खी है क्यूँ न आ जाए महकने का हुनर लफ़्ज़ों को तेरी चिट्ठी जो किताबों में छुपा रक्खी है तेरी बातों को छुपाना नहीं आता मुझ से तू ने ख़ुश्बू मिरे लहजे में बसा रक्खी है ख़ुद को तन्हा न समझ लेना नए दीवानों सहराओं की हम ने भी उड़ा रक्खी है ख़ाक प्यास दरिया की निगाहों से छुपा रक्खी है एक बादल से बड़ी आस लगा रक्खी है तेरी आँखों की कशिश कैसे समझाऊँ तुझे इन चराग़ों ने मिरी नींद उड़ा रक्खी है क्यूँ न आ जाए महकने का हुनर लफ़्ज़ों को तेरी चिट्ठी जो किताबों में छुपा रक्खी है तेरी बातों को छुपाना नहीं आता मुझ से तू ने ख़ुश्बू मिरे लहजे में बसा रक्खी है ख़ुद को तन्हा न समझ लेना नए दीवानों सहराओं की हम ने भी उड़ा रक्खी है ख़ाक - ShareChat