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#❤️मेरा बड़ा भाई ❤️
❤️मेरा बड़ा भाई ❤️ - अलग रहो मगर भाइयो से अनबन मत रखो! गोँव मे भाईयों से लड़ कर आया थात दस साल से बोलचाल बन्द थी। भाईयों के साथ प्रॉपर्टी का मुकदमा भी चल रहा था। बैठे बेठे विचार कि मुझे लड़ने झड़ने से मिला क्या? दस साल से किराये के मकान সামা मे रह रहा हूँ। ना कोई रिश्तेदार हे न कोई फिक्र करने वाला। आज बीवी  बीमार है अकेले हॉस्पिटल मे बैठा हूँ। दो दिन से नहाया भी नही हूँ। अगर मेरे अपने मेरे साथ होते तो मेरी ऐसी हालत होती क्या? अचानक मैंने अपने बड़े भाई को फोन मिला दिया। पूरी रिंग गई मगर भैया ने नही हिम्मत करके दुबारा फोन मिलाया। इस बार भैया ने फोन उठा  उठाया। लिया। मगर कुछ आवाज नही आई। मै बोला " भैया? उधर से भैया का दिया ' फोन क्यो किया?" मै बोला " आपकी बहु बीमार कर्कस स्वर S` हे भेया। दस दिन से हॉस्पिटल में भर्ती हे। बच्चे घर मे अकेले हे। मे थक 941 कहते हुए मुझे रोना आ गया। भैया की वही भारी आवाज  ೯ गया और तु अब बता रहा है। रो मत मै आ रहा हूँ दी।  दस दिन हो गए 37ాకే . उसके बाद घण्टे भर मे भाई भाभी, भतीजे सब आ गए। आते ही उन्होंने सब सम्भाल लिया। उनके आते ही महसूस हुआ कि मेरी असली ताकत तो यही लोग हे। उन्हे देखते ही हिम्मत सो गुनी हो गई थी। उनके आने पर पत्नी की तबियत भी जल्दी ठीक हो गई। फिर मै भाईयों के साथ गांव लौट आया। मोरलः जिंदगी वही है जो अपनो के साथ अपनो के Tri दुख सुख मे यही तो काम साथ केसा झगडा ? केसी लडाई? केसी इग्गो? आयेंगे। भाई हिम्मत है। भाई रक्षा कवच है। भाई हो तो पीठ सुनी नही पडती। इसलिए बेशक अलग रहो मगर भाइयो से अनबन मत रखो! nliu अलग रहो मगर भाइयो से अनबन मत रखो! गोँव मे भाईयों से लड़ कर आया थात दस साल से बोलचाल बन्द थी। भाईयों के साथ प्रॉपर्टी का मुकदमा भी चल रहा था। बैठे बेठे विचार कि मुझे लड़ने झड़ने से मिला क्या? दस साल से किराये के मकान সামা मे रह रहा हूँ। ना कोई रिश्तेदार हे न कोई फिक्र करने वाला। आज बीवी  बीमार है अकेले हॉस्पिटल मे बैठा हूँ। दो दिन से नहाया भी नही हूँ। अगर मेरे अपने मेरे साथ होते तो मेरी ऐसी हालत होती क्या? अचानक मैंने अपने बड़े भाई को फोन मिला दिया। पूरी रिंग गई मगर भैया ने नही हिम्मत करके दुबारा फोन मिलाया। इस बार भैया ने फोन उठा  उठाया। लिया। मगर कुछ आवाज नही आई। मै बोला " भैया? उधर से भैया का दिया ' फोन क्यो किया?" मै बोला " आपकी बहु बीमार कर्कस स्वर S` हे भेया। दस दिन से हॉस्पिटल में भर्ती हे। बच्चे घर मे अकेले हे। मे थक 941 कहते हुए मुझे रोना आ गया। भैया की वही भारी आवाज  ೯ गया और तु अब बता रहा है। रो मत मै आ रहा हूँ दी।  दस दिन हो गए 37ాకే . उसके बाद घण्टे भर मे भाई भाभी, भतीजे सब आ गए। आते ही उन्होंने सब सम्भाल लिया। उनके आते ही महसूस हुआ कि मेरी असली ताकत तो यही लोग हे। उन्हे देखते ही हिम्मत सो गुनी हो गई थी। उनके आने पर पत्नी की तबियत भी जल्दी ठीक हो गई। फिर मै भाईयों के साथ गांव लौट आया। मोरलः जिंदगी वही है जो अपनो के साथ अपनो के Tri दुख सुख मे यही तो काम साथ केसा झगडा ? केसी लडाई? केसी इग्गो? आयेंगे। भाई हिम्मत है। भाई रक्षा कवच है। भाई हो तो पीठ सुनी नही पडती। इसलिए बेशक अलग रहो मगर भाइयो से अनबन मत रखो! nliu - ShareChat